झारखंड

झारखंड में यहां 200 पारा शिक्षकों के पास नहीं था मोबाइल, रुक गया वेतन

जमशेदपुर: जिले के स्कूलों के शिक्षकों से शिक्षा विभाग का एप डाउनलोड कर हाजिरी बनाने का निर्देश मिला था। जिसे लेकर स्कूल में शिक्षकों की हाजिरी बनाने के लिए टैब भी दिया गया था, लेकिन स्कूल ऐसे थे, जहां टैब नहीं पहुंच पाया था।

अब टैब नहीं होने की वजह से 200 पारा शिक्षकों के वर्ष 2020 के तीन माह का वेतन रोक दिया गया है। यह वेतन (जनवरी, फरवरी और मार्च) का इसलिए बकाया है क्योंकि इनके पास मोबाइल फोन (टैब) नहीं था।

बता दें कि न तो शिक्षकों के पास मोबाईल था और न ही स्कूल में टैब उपलब्ध था। लिहाजा वे अपनी उपस्थिति नहीं बना सके। इस कारण उनके वेतन पर रोक लगायी गयी है।

पारा शिक्षकों की मानें तो पिछले वर्ष हर स्कूल में शिक्षकों की हाजिरी बनाने के लिए टैब दिया गया।

क्या कहता है पारा शिक्षक संघ

इस संबंध में पारा शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुमित कुमार ने कहा है कि 66 पारा शिक्षकों को सरकार और शिक्षा विभाग से उम्मीद है। उनकी मांगें जल्द मानी जाएंगी। कई शिक्षकों का वेतन भुगतान नहीं हुआ है।

पिछले वर्ष ऑनलाइन हाजिरी नहीं बनाने के चलते वेतन रुका। जिनका वेतन अधिकतम 15 हजार रुपये है, वे 15 हजार का एंड्रॉयड फोन कहां से खरीद सकते है। इन्हें तीन श्रेणी में 13, 14 और 15 हजार रुपये वेतन दिये जाते हैं।

पारा शिक्षकों का कहना है कि इतने कम रुपये में घर तो बड़ा मुश्किल से चल पाता है।

ऐसे में एंड्रॉयड मोबाइल लेना संभव नहीं है। यदि उनके स्कूल में टैब रहता तो वे भी हाजिरी बना लेते। यह बात उस वक्त भी उनके द्वारा शिक्षा विभाग को बतायी गयी थी।

वर्ष 2019 से भी 63 पारा शिक्षकों का रुका है वेतन

वर्ष 2019 से भी 63 पारा शिक्षकों का वेतन रुका हुआ है। इन पारा शिक्षकों ने बायोमीट्रिक से हाजिरी नहीं बनायी थी। उनका जुलाई, अगस्त और सितम्बर महीने का वेतन नहीं दिया गया।

इसपर शिक्षकों का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी। वेतन कटौती के बाद पता चला कि बायोमीट्रिक से हाजिरी नहीं बनाने के चलते वेतन रोका गया।

जनवरी, फरवरी और मार्च 2020 का वेतन नहीं हुआ जारी

एप को डाउनलोड कर हाजिरी बनाने का निर्देश दिया गया था। इनमें कई पारा शिक्षक ऐसे थे, जिनके पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं था।

तीन महीने तक ऑनलाइन हाजिरी दर्ज कराने की प्रक्रिया चली थी। इस कारण उनका वेतन रोका गया।

हालांकि, कुछ स्कूल ऐसे थे, जहां टैब नहीं पहुंच पाया था वहां शिक्षकों को। ऐसे में संबंधित स्कूलों के शिक्षकों से शिक्षा विभाग का एप डाउनलोड कर हाजिरी बनाने का निर्देश मिला था।

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