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भारत-अमेरिका ने सीखा काउंटर टेरेरिज्म के खिलाफ अटैक करना

बीकानेर: बीकानेर की महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आठ फरवरी से शुरू हुआ भारत और अमेरिका का संयुक्त युद्धाभ्यास रविवार को सशस्त्र परेड के साथ संपन्न हो गया।

इन पंद्रह दिनों में दोनों देशों ने काउंटर टेरेरिज्म के खिलाफ एक साथ लड़ने की तैयारी की।

रेंज के कार्यक्रम स्थल पर दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने एक-दूसरे का आभार जताया और भविष्य में इस तरह के युद्धाभ्यासों के लिए अपने जवानों को प्रेरित करने का संकल्प किया।

इस महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संयुक्त युद्धअभ्यास में भारतीय सेना के ‘सप्तशक्ति कमान’ की 11 जैक राइफल्स बटालियन ने भारतीय सेना का प्रतिनिधित्व किया, जबकि अमेरिकी सेना के दस्ते का प्रतिनिधित्व 2 बटालियन, 3 इन्फैंट्री रेजिमेंट, 7वीं इन्फैंट्री डिवीजन का हिस्सा 1-2 स्ट्राइकर ब्रिगेड कॉम्बैट टीम द्वारा किया गया।

यह द्विपक्षीय युद्धअभ्यास संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत रेगिस्तानी इलाके की पृष्ठभूमि में काउंटर टेररिज्म ऑपरेशन पर केंद्रित रहा।

युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सैन्य टुकडिय़ों में बेहतर सामंजस्य एवं आपसी सद्भाव की स्थापना के साथ साथ उग्रवाद विरोधी अभियानों एवं सामरिक कार्यवाहियों को सफलतापूर्वक अंजाम देना था।

युद्धाभ्यास ने दोनों सैन्य टुकडिय़ों को एक-दूसरे के बैटल ड्रिल एवं ‘ऑपरेशनल प्रोसीजर’ को समझने का बेहतरीन अवसर प्रदान किया।

रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल अमिताभ ने बताया कि युद्धाभ्यास दो चरणों में आयोजित किया गया।

पहले चरण में तकनीकी कौशल एवं युद्ध जैसे हालात की कार्यवाही शामिल थी।

प्रथम चरण में हासिल किए गए अनुभव एवं सामरिक क्रियाकलाप को दोनों सैन्य दस्तों ने द्वितीय चरण में जमीनी हालात में जांचा और परखा।

दोनों सैन्य टुकडिय़ों ने 54 घंटे की वैलिडेशन अभ्यास की कार्यवाही को सामूहिक रूप से सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

इसमें विभिन्न काउंटर आतंकवादी अभियानों की योजना और निष्पादन शामिल था।

इस अभ्यास का मुख्य आकर्षण सैनिकों द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली बोनहोमी और कैमाराडरि थी, जिससे सभी स्तरों पर एकीकरण और उपलब्धि सुनिश्चित हुई।

इस वैलिडेशन अभ्यास को अमेरिकी सेना के यूनाइटेड स्टेट्स आर्मी पैसिफिक डिप्टी कमांडर जनरल मेजर जनरल डैनियल मैक डैनियल और 7 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल जेवियर ब्रूनसन और भारतीय सेना के मेजर जनरल माइकल फर्नांडीज एवं जनरल ऑफिसर कमांडिंग रणबांकुरा डिवीजन के मेजर जनरल गुरप्रीत सिंह ने देखा और परखा।

युद्धाभ्यास के दौरान कई एरियल प्लेटफॉर्म में भारतीय सेना में हाल ही में शामिल हुए नए स्वदेशी एडवांस लाइट हेलीकॉप्टर डब्ल्यूएसआई ‘रुद्र’, एमआई-17, चिनूक, अमेरिकी सैना के स्ट्राइकर वाहन और भारतीय सेना के बीएमपी-मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल का भी उपयोग किया गया।

युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सेनाओं ने सीखा

हथियारों की तकनीक : दोनों देशों ने अपने अपने हथियार एक्सचेंज किए।

भारत के जवानों ने अमेरिकी टैंक स्ट्राइकर को साधने का प्रयास किया तो अमेरिकी जवानों ने बीएमपी2 के साथ बमबारी करने का अभ्यास किया।

प्लानिंग की कुशाग्रता : दोनों देशों ने समझा कि किसी भी युद्धस्थल पर उतरने से पहले प्लानिंग कैसे की जा सकती है। इस प्लानिंग में किन किन बातों को खास ध्यान रखना होता है।

जब टैंक मोर्चा संभाले हुए हैं तो बैक में हेलीकाप्टर कैसे काम करेंगे, जब जवान आगे बढ़ रहे हैं तो ड्रोन सहित अन्य संसाधनों का उपयोग कैसे होगा?

तकनीकी सहयोग : भारत और अमेरिका के पास अपनी अपनी तकनीक है।

अमेरिका के पास भारत से ज्यादा एडवांस हथियार है तो हमारे पास पुराने होने के बावजूद कारगर व मजबूत हथियार है। इन दोनों की तकनीक को समझने का मौका मिला।

अमेरिकी हथियार चलाने का अवसर : भारतीय जवान अपने हथियारों के साथ दुश्मन को खत्म करने का दमखम रखते हैं लेकिन अमेरिकी हथियारों की समझ इस अभ्यास के दौरान बनी।

भारतीय जवानों को अमेरिका के एम 5.56, 60 एमएम मोर्टार, 7.62 मशीन गन, दुनिया का सबसे छोटा ब्लैक हॉर्नेट ड्रोन और रावेन के बारे में समझने का मौका मिला।

पाकिस्तान को संदेश

आतंकवाद के खिलाफ भारत का यह युद्धाभ्यास एक तरह से पाकिस्तान को चेतावनी भी है।

पाकिस्तान से महज सौ किलोमीटर की एयर डिस्टेंस पर हुए इस युद्धाभ्यास में अमेरिका ने अपने 18 ग्राम के ड्रोन से लेकर स्ट्राइकर टैंक सहित कई हथियारों से अपनी शक्ति दिखाई।

अमेरिकी सेना ने भारत के रेगिस्तान में काम करने का अनुभव लिया।

इस तरह की जगह अमेरिका में नहीं है लेकिन एशिया के कई देशों में इस तरह के रेतीले धोरे हैं।

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