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17 दिन साइकिल चला ओडिसा से पहुंचे दिल्ली, किसानों के समर्थन में बनाई मूर्ति

गाजीपुर बॉर्डर: कृषि कानून के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए 17 दिन में साइकिल चला कर एक मूर्तिकार ओडिसा से गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे, मुक्तिकांत बिस्वाल एक मूर्तिकार हैं।

मुक्तिकांत साइकिल से बॉर्डर पहुंचे हुए हैं और मूर्ति बनाकर किसानों को अपना समर्थन दे रहे हैं।

32 वर्षीय मुक्तिकांत बिस्वाल ओडिसा के रहने वाले हैं, जहां वे और उनके पिता मूर्ति बनाने का काम करते हैं और यही इनका रोजगार भी है।

करीब 3 महीनों से दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है।

हर कोई अपने अनुसार इस आंदोलन में शरीक हो रहा है। ऐसे में मुक्तिकांत बिस्वाल बॉर्डर पर मूर्ति बनाकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

मुक्तिकांत ने मिट्टी की मदद से 3 मूर्तियां तैयार की हैं, जिसमें एक कॉरपोरेट व्यक्ति को दर्शाया है तो वहीं दो किसानों को भी बनाया है। हालांकि उन्होंने किसानों की तुलना बैल से की है।

मुक्तिकांत बिस्वाल ने आईएएनएस को बताया, मैं ये मूर्तियां किसानों के समर्थन में बना रहा हूं, कांट्रैक्ट फामिर्ंग के ऊपर मैंने ये मूर्तियां बनाई हैं।

तीनो मूर्तियों में 2 किसान रहेंगे, जिनके कंधे पर हल रहेगा। वहीं एक सेठ टाइप व्यक्ति रहेगा, जिनके एक हाथ में हल और दूसरे हाथ में हंटर रहेगा।

बैल की जगह दो किसानों को दर्शाया है जिनके कंधे पर हल रहेगा। मैं कृषि कानून के खिलाफ हूं, 29 जनवरी को बॉर्डर पहुंचा था।

हालांकि मुक्तिकांत बिस्वाल इन मूर्तियों को पूरा करने के बाद कृषि विषयों पर और भी मूर्ति बनाएंगे।

सरकार और किसान संगठनों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है।

दूसरी ओर फिर से बातचीत शुरू हो इसके लिए किसान और सरकार दोनों तैयार हैं, लेकिन अभी तक बातचीत की टेबल पर नहीं आ पाए हैं।

दरअसल तीन नए अधिनियमित खेत कानूनों के खिलाफ किसान पिछले साल 26 नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसान उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम 2020, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020 पर किसान सशक्तिकरण और संरक्षण समझौता हेतु सरकार का विरोध कर रहे हैं।

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