रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने जेएम कॉलेज, भुरकुंडा में फिजिक्स लेक्चरर की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर अंतिम फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता अरविंद शरण की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उनकी याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले के साथ ही करीब 25 साल से चला आ रहा मामला समाप्त हो गया है।
क्या था मामला
अरविंद शरण ने वर्ष 2001 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि बिहार कॉलेज सर्विस कमीशन (बीसीएससी) की 14 फरवरी 2000 की सिफारिश के आधार पर वे जेएम कॉलेज में फिजिक्स लेक्चरर बनने के योग्य थे। उन्होंने विज्ञापन संख्या 24/1994 के तहत आवेदन किया था और आरोप लगाया था कि नियुक्ति में आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया।

याचिकाकर्ता की दलील
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि अरविंद शरण ने एमएससी फिजिक्स प्रथम श्रेणी से पास की थी और इंटरव्यू में भी सफल रहे थे। इसके बावजूद कॉलेज की ओर से उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया। उनका यह भी कहना था कि तीसरा पद विज्ञापन संख्या 1418/1994 के अंतर्गत था, जहां केवल एक ही पद था, इसलिए वहां आरक्षण लागू नहीं होता।
सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी कि बीसीएससी का काम वर्ष 2007 में ही समाप्त हो चुका है और इस मामले से जुड़े कई रिकॉर्ड अब उपलब्ध नहीं हैं। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता ने तीसरे पद के लिए आवेदन ही नहीं किया था।
कोर्ट का निर्णय
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने की। कोर्ट ने पाया कि संबंधित पद पर पहले ही दूसरे उम्मीदवार विनोद कुमार सिंह को प्रथम विकल्प के रूप में चुना जा चुका था। कोर्ट ने कहा कि जो उम्मीदवार लंबे समय से सेवा दे रहे हैं, उनके हित में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया कि वर्षों पुराने मामलों में ठोस प्रमाण और सही प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी होता है। हाईकोर्ट के इस निर्णय से कॉलेज की नियुक्ति प्रक्रिया पर लगी अनिश्चितता भी समाप्त हो गई है।





