कोरोना का JN.1 वेरिएंट फिर डराने लगा, मुंबई में 2 मौतें, केरल-महाराष्ट्र में अलर्ट

News Aroma
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Corona’s JN.1 variant: कोरोना वायरस का नया वेरिएंट JN.1 सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग, और चीन में तेजी से फैल रहा है, जिससे भारत में भी 2020-21 की खौफनाक यादें ताजा हो रही हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 19 मई 2025 तक भारत में 257 सक्रिय कोविड केस हैं, ज्यादातर केरल (69), महाराष्ट्र (44), और तमिलनाडु (34) में।

मुंबई के KEM अस्पताल में दो कोविड पॉजिटिव मरीजों की मौत हुई, हालांकि दोनों को कैंसर और किडनी रोग जैसी गंभीर बीमारियां थीं। स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर मास्क, सैनिटाइजर, और टेस्टिंग पर जोर दिया है। सवाल उठ रहे हैं: JN.1 वेरिएंट क्या है, कितना खतरनाक है, और इससे कैसे बचा जाए?

JN.1 वेरिएंट क्या है? ओमिक्रॉन का नया रूप

JN.1 ओमिक्रॉन के BA.2.86 वंश का सब-वेरिएंट है, जिसकी पहचान अगस्त 2023 में हुई थी। जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के अनुसार, इसके 30 से ज्यादा म्यूटेशन्स इसे इम्यून सिस्टम से बचने और तेजी से फैलने में मदद करते हैं। इसके सब-वेरिएंट्स LF.7 और NB.1.8 सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग में मामले बढ़ा रहे हैं।

हालांकि, यह BA.2.86 की तरह कभी प्रमुख वेरिएंट नहीं बना। लक्षण पुराने जैसे हैं: सूखी खांसी, बुखार, सिरदर्द, स्वाद-गंध का जाना।

कितना खतरनाक है JN.1? कमजोर इम्यूनिटी वालों को खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, JN.1 के गंभीर होने या तेजी से फैलने के कोई ठोस सबूत नहीं हैं। डॉ. मोहसिन वली (सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली) कहते हैं, “यह पुराने ओमिक्रॉन वेरिएंट्स से बहुत अलग नहीं। हल्के लक्षणों वाले मरीजों को अस्पताल की जरूरत नहीं पड़ रही।”

लेकिन बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, और डायबिटीज, कैंसर, या कमजोर इम्यूनिटी वालों को सावधानी बरतनी चाहिए। सिंगापुर में 1-19 मई तक 3,000 केस और हॉन्गकॉन्ग में 30 मौतें (ज्यादातर बुजुर्ग) दर्ज हुईं, जो कमजोर इम्यूनिटी पर जोर देती हैं।

भारत में स्थिति नियंत्रण में, लेकिन सतर्कता जरूरी

स्वास्थ्य मंत्रालय की 19 मई की समीक्षा बैठक में कहा गया कि 257 केस देश की 140 करोड़ आबादी के लिए नगण्य हैं। सभी मामले हल्के हैं, और अस्पताल में भर्ती की जरूरत नहीं पड़ी। ICMR और IDSP के जीनोम सीक्वेंसिंग प्रोग्राम ने पुष्टि की कि भारत में JN.1 की मौजूदग नहीं साबित हुई है।

मुंबई की दो मौतें कोविड से सीधे जुड़ी नहीं, बल्कि सह-रोगों (co-morbidities) से थीं। फिर भी, मंत्रालय ने राज्यों को टेस्टिंग, ट्रेसिंग, और वैक्सीनेशन बढ़ाने को कहा है।

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