झारखंड सरकार ने नई नियमावली राज्यपाल को स्वीकृति के लिए भेजा

वर्तमान में पदस्थापित संविदा सहायक प्राध्यापक अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं

रांची: झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं नव अंगिभूत महाविद्यालयों में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए नई नियुक्ति नियमावली 2018 को राज्य सरकार की ओर से विधानसभा में पारित कर राज्यपाल को स्वीकृति के लिए भेजा गया है।

जिसमें सहायक प्राध्यापक नियमावली की प्राथमिकता सूची में नहीं हैं।

कार्यानुभव संबंधी अधिभार नई नियमावली में शामिल नहीं की गई है।

इससे वर्तमान में पदस्थापित संविदा सहायक प्राध्यापक अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

इस ओर रांची विश्वविद्यालय अनुबंध सहायक प्राध्यापक संघ, रांची विश्वविद्यालय इकाई के उपाध्यक्ष डॉ रीझू नायक ने इस संबंध में मंगलवार को पत्र लिखकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को अवगत कराया है।

डॉ रीझू नायक ने राज्यपाल को भेजे पत्र में कहा है कि झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं नव अंगिभूत महाविद्यालयों में अनुबंध सहायक अध्यापक के रूप में सेवारत अभ्यर्थियों के लिए प्रति वर्ष पांच अंको का अधिभार दिया जाए।

वर्तमान में कार्यरत संविदा सहायक प्राध्यापकों को नियुक्ति में 50 फ़ीसदी स्थान सुरक्षित किया जाए।

दिव्यांग श्रेणी यथा दृष्टिबाधित, मुकवधिर, बाहरपन एवं शारीरिक दिव्यांगता श्रेणी के दिव्यांग अभ्यर्थी नहीं मिलने पर उसी श्रेणी के अन्य दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों को मौका मिलना चाहिए।

साक्षात्कार में न्यूनतम अंक के लिए पैरामीटर निर्धारित कर दस से 15 अंक का ही लिया जाए, ताकि अभ्यर्थियों के साथ पारदर्शिता व न्याय बना रहे।

डॉ नायक ने राज्यपाल से नयी नियमावली 2018 में झारखंड के स्थानीय अभ्यर्थियों को ध्यान में रखकर आवश्यक संशोधन करने की बात कही है ताकि वर्षों से उपेक्षित युवाओं को न्याय मिल सके।

1 जुलाई 2021 से लागू होगी नई व्यवस्था

झारखंड सरकार अब अंशदायी पेंशन याेजना में अपने कमर्चारियाें के मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 14 प्रतिशत अंशदान देगी। यह याेजना एक जुलाई 2021 से लागू हाेगी।

अभी सरकार और कर्मचारियाें का अंशदान 10-10 प्रतिशत है। यह फैसला मंगलवार काे कैबिनेट की बैठक में लिया गया। बैठक में कुल आठ प्रस्तावाें पर मुहर लगाई गई।

केंद्र सरकार ने 31 जनवरी 2019 काे ही अपने कर्मचारियाें की अंशदायी पेंशन याेजना में अंशदान 10% से बढ़ाकर 14% कर दिया था।

इसके बाद बिहार सरकार ने भी इस फैसले को लागू कर दिया था। केंद्र ने 2003 में पेंशन स्कीम खत्म कर अंशदायी पेंशन याेजना लागू की थी।

इस के बाद रिटायर हाेने वाले अधिकारियाें-कर्मियों की आजीवन पेंशन या पारिवारिक पेंशन सुविधा खत्म हाे गई।

कर्मचारी और नियाेक्ता द्वार अंशदायी पेंशन याेजना में जमा हुई राशि ही रिटायरमेंट के बाद एकमुश्त मिल जाती है।

सरकार पर पड़ेगा 342 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ

राज्यकर्मियों की पेंशन योजना में अंशदान की बढ़ाेतरी से सरकार पर सालाना 342 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा।

वित्तीय वर्ष 2020-21 में इस स्कीम में राज्य सरकार को 583 करोड़ रुपए का अंशदान देना पड़ा था।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में लगभग 925 करोड़ के अंशदान का अनुमान लगाया गया था। अब अंशदान की राशि को 10 से बढ़ा कर 14% करने पर अतिरिक्त 342 करोड़ के खर्च का अनुमान है।

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