झारखंड सरकार ने निजी अस्पतालों के वैक्सीन का कोटा घटाकर पांच फीसदी करने का किया केंद्र से अनुरोध

रांची: झारखंड सरकार ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि जो 25 प्रतिशत टीका प्राइवेट अस्पतालों को दिया जाना है, उसे घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया जाए।

इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखा है।

स्वास्थ्य विभाग के नोडल पदाधिकारी सिद्धार्थ त्रिपाठी ने मंगलवार को बताया कि राज्य के 75 प्रतिशत लोग गांव में रहते हैं।

उनकी पहुंच प्राइवेट अस्पतालों तक नहीं है। बीपीएल परिवार 37 प्रतिशत है जो टीका लगवाने में असमर्थ हैं।

राज्य के 24 जिलों में 13 जिले आदिवासी बहुल क्षेत्र हैं। 19 जिले नक्सल प्रभावित हैं।

दो प्रतिशत से भी कम टीका प्राइवेट अस्पतालों द्वारा किया गया है। 16 जून के बाद बहुत कम लोग प्राइवेट अस्पतालों में टीका लेने के लिए आए।

उन्होंने बताया कि इसे देखते हुए भारत सरकार से अनुरोध किया गया है कि प्राइवेट अस्पतालों को पांच प्रतिशत वैक्सीन दिया जाए और राज्य को 95 प्रतिशत वैक्सीन उपलब्ध कराया जाए।

28 जून को अपर मुख्य सचिव ने केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव को इस संबंध में पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि राज्य में नेशनल वेक्टर बाल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम ( एनवीवीडीसीपी) प्रोग्राम चलाया जा रहा है।

इस प्रोग्राम का दायरा बढ़ा है। इसमें छह तरह की बीमारियां होती हैं।  जिसमें डेंगू, चिकनगुनिया, जैपनीज एन्सेफेलाइटिस, फाइलेरिया, कालाजार और मलेरिया शामिल हैं।

इन बीमारियों के कंट्रोल को लेकर सभी जिलों को पत्र भेजा गया है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी प्री मानसून के पहले और बाद आती है।

डेंगू के लिए टीका नहीं है। इसके लिए जागरूकता जरूरी है। जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका उपलब्ध है।

यह टीका नौ से 12 और 16 से 24 माह में दिया जाता है। इसे लेकर राज्य में अभियान चल रहा है।

सभी डीसी को निर्देश दिया गया है। इसके सर्वे का काम भी प्रारंभ हो रहा है। नौ मरीज सर्विलांस के माध्यम से सामने आए हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 82 हजार वैक्सीन का उपलब्ध है।

केंद्र सरकार से अनुरोध किया गया है कि वह जल्द से जल्द समय टीका उपलब्ध कराए।

हमें उम्मीद है कि जल्द ही हमें टीका मिल जाएगा।  उन्होंने कहा कि कई टीका केंद्रों में परेशानी हुई है।

लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनिटाइजर नहीं लगाने की वजह से यह स्थिति उत्पन्न होती है।  ऐसे में लोगों को धैर्य रखना चाहिए।

वर्तमान में सबसे ज्यादा टीका भारत लगा चुका है।  इसलिए टीका सबको लगेगा। लेकिन हमें घबराना नहीं है हमें धैर्य रखना होगा।

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