देश के 6 राज्यों में सबसे अधिक मौतें, ब्लैक फंगस पर सरकार उठा रही कदम: स्वास्थ्य मंत्रालय

नई दिल्ली: देश में कोरोना महामारी का संकट लगातार जारी है।

केंद्र से लेकर राज्य सरकार लोगों को राहत देने के लिए अपने-अपने स्तर पर हर संभव कोशिश कर रही है।

इसके साथ-साथ स्वास्थ्य मंत्रालय भी देश में कोरोना की स्थिति को लेकर लोगों को लगातार जानकारी दे रहा है।

इसी क्रम में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि केवल सात राज्य ऐसे हैं जहां 10 हजार से अधिक मामले आ रहे हैं और 5- 10 हजार मामलों वाले 6 राज्य हैं। वहीं 6 राज्यों में सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं।

इनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, यूपी, पंजाब और दिल्ली का नाम शामिल है।

उन्होंने कहा कि पिछले 20 दिनों से देश में सक्रिय मामलों में कमी देखी जा रही है।

तीन मई को देश में 17.13 फीसदी सक्रिय मामले थे और अब यह 11.12 फीसदी हो गया है।

रिकवरी रेट भी 87.76 फीसदी हो चुकी है। देश में 2 करोड़ 30 लाख से ज्यादा लोग रिकवर हो चुके हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि ब्लैक फंगस के लिए एमफोटेरेसिन-बी जिसकी देश में सीमित उपलब्धता थी, उसे बढ़ाया जा रहा है।

5 अतिरिक्त मैन्युफैक्चर्स का लाइसेंस दिलाने का कार्य किया जा रहा है।

अभी जो मैन्युफैक्चर्स हैं, वो भी उत्पादन बढ़ा रहे हैं।

1 लाख से अधिक सक्रिय मामले केवल 8 राज्यों में

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार लव अग्रवाल ने कहा कि एक लाख से अधिक सक्रिय मामले अब केवल आठ राज्यों में रह गए हैं।

50 हजार से एक लाख के बीच सक्रिय मामले वाले राज्य भी आठ हो गए हैं।

50 हजार से कम सक्रिय मामले वाले 20 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं। पिछले 24 घंटों में देश में 2,57,000 मामले दर्ज़ किए गए हैं।

जबकि 3,57,630 लोग रिकवर हुए हैं। 78 फीसदी नए मामले 10 राज्यों से दर्ज किए जा रहे हैं।

सिर्फ 7 राज्यों में प्रतिदिन 10 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं।&;

8-44 आयु वर्ग के लिए 92 लाख वैक्सीन की खुराक

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अब तक देश में 18.41 करोड़ वैक्सीन की डोज 45 वर्ष से ज्यादा आयु वर्ग, हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई हैं।

18-44 आयु वर्ग के लिए 92 लाख के लगभग डोज अब तक उपलब्ध कराई गई हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि बच्चों में अगर कोरोना हो भी रहा है तो उनमें हल्के लक्षण पाए जा रहे हैं। और मृत्यु दर बहुत ही कम है।

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