समय के साथ कोरोना वैक्सीन की बढ़ी कीमत, महंगी हुई डोज

Digital News
4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

नई दिल्ली: पूरे देश में कोरोना महामारी को रोकने के लिए जारी टीकाकरण अभियान को शुरू हुए 6 महीने से अधिक समय हो गया है।

वही अब उम्मीद थी कि वैक्सीन का उत्पादन बढ़ने के साथ ही इनकी कीमतों में और भी अधिक गिरावट आ सकती है लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि केंद्र सरकार पर खर्चा पहले की तुलना में और अधिक बढ़ गया है।

केन्द्र सरकार ने इस जनवरी 2021 में केवल जुलाई तक के लिए ही फार्मा कंपनियों के साथ कीमत तय की थी।

उस दौरान कोविशील्ड की एक खुराक 200 रु और कोवाक्सिन की 206 रु कीमत तय हुई थी लेकिन अब नई कीमतों के तहत यह कीमत बढ़कर 205 रु और 215 रु हो चुकी है।

यानी कोविशील्ड वैक्सीन की एक शीशी पर सरकार को 50 रु अधिक (एक शीशी में 10 खुराक) देने पड़ रहे हैं। जबकि कोवाक्सिन की एक शीशी पर यह खर्चा 180 रु (एक शीशी में 20 खुराक) तक महंगा हो गया है। अब सरकार को इन्हीं कीमतों पर नया ऑर्डर देना पड़ा है।

सरकार ने वैक्सीन का दिया ऑर्डर

केंद्र सरकार ने वैक्सीन खरीदने के लिए पहला ऑर्डर इस साल 10 जनवरी को दिया था। उस दौरान कोविशील्ड की 1.1 करोड़ और कोवाक्सिन 55 लाख डोज का ऑर्डर दिया, लेकिन इसके बाद फरवरी में 3 बार ऑर्डर (3,10 और 24 फरवरी) दिया जिसके तहत कोविशील्ड को 4.50 करोड़ डोज शामिल थीं।

वही कोवाक्सिन की केवल 45 लाख डोज ही शामिल रहीं है। 12 मार्च, 5 मई और 16 जुलाई को क्रमश: 12, 16 और 66 करोड़ डोज का ऑर्डर दिया जा चुका है।

अब तक सरकार 100 करोड़ डोज का ऑर्डर सिर्फ 2 कंपनियों को दे चुकी है, जिनमें अकेले सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पास 64.1 करोड़ डोज का ऑर्डर है। जबकि भारत बायोटेक के पास केवल 36.5 करोड़ डोज का ऑर्डर है।

भारत बायोटेक को 28.5 करोड़ खुराक का ऑर्डर

स्वास्थ्य मंत्रालय के आकड़ो के अनुसार केंद्र सरकार ने 16 जुलाई 2021 को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को कोविशील्ड वैक्सीन की 37.5 करोड़ खुराक का ऑर्डर दिया है। जबकि भारत बायोटेक को 28.5 करोड़ खुराक का ऑर्डर मिला है।

इसके पीछे एक बड़ी वजह कुल वैक्सीन का 75 फीसदी आपूर्ति सरकारी केंद्रों में शामिल होना माना जा रहा है।

हालांकि भारत बायोटेक की कोवाक्सिन स्वदेशी होने के बावजूद कोविशील्ड की तुलना में अभी भी महंगी है। एक लंबा वक्त गुजरने के बाद भी जहां एक तरफ कोवाक्सिन का उत्पादन अभी भी मंद गति से चल रहा है।

वहीं दूसरी ओर इसकी महंगी दरें सरकार के साथ साथ आम आदमी के लिए भी ज्यादा हैं क्योंकि निजी टीकाकरण केंद्रों में इन दिनों सबसे महंगी वैक्सीन भी यही है।

आईसीएमआर को 5 फीसदी मुनाफा

भारत बायोटेक की कोवाक्सिन पहली स्वदेशी कोरोना वैक्सीन है। इसे नई दिल्ली स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने तैयार किया है।

इस वैक्सीन को लेकर हुए एमओयू के अनुसार कोवाक्सिन की हर डोज पर पांच फीसदी का मुनाफा आईसीएमआर को मिलना तय है। यह मुनाफा साल में दो बार (हॉफ ईयर) में आईसीएमआर को मिलेगा।

Share This Article