नक्सलियों के चेन आफ इनकम ध्वस्थ करने की रणनीति

नक्सलियों के चेन आफ इनकम ध्वस्थ करने की रणनीति

गया: केंद्र और राज्य सरकार प्रतिबंधित नक्सली संगठनों के आय स्रोत पर विशेष नजर रख रही है। नक्सलियों के "चेन आफ इनकम" को ध्वस्त करने के लिए केन्द्रीय एजेंसी ईडी द्वारा कई कुख्यात नक्सली कमांडरों की संपत्ति पूर्व में जब्त की जा चुकी है।

बिहार पुलिस का फोकस झारखंड की सीमा से लगे बिहार के गया, औरंगाबाद और जमुई जिले में सक्रिय नक्सलियों पर हैं।

गया और औरंगाबाद के कुख्यात नक्सली कमांडर संदीप यादव,विजय यादव सहित अन्य की चल- अचल संपत्ति को पूर्व में प्रर्वतन निदेशालय द्वारा जब्त किया जा चुका है। बिहार पुलिस की अनुशंसा पर कुख्यात नक्सली कमांडरों की संपत्ति ईडी के निशाने पर हैं।

पुलिस और अर्धसैनिक बल के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि नक्सली संगठन लेवी, भूमि- विवाद और अन्य स्रोतों से करोड़ों रुपए की नाजायज वसूली कर अपने संगठन के नाम पर करता है।

अवैध वसूली का एक बड़ा हिस्सा नक्सली कमांडर अपनी अवैध संपत्ति के साम्राज्य को खड़ा करने में इस्तेमाल करता है।जो पत्नी,परिजन और विश्वस्त लोगों के नाम होता है।

नक्सलियों के मंसूबे को विफल करने के लिए समय-समय पर बिहार पुलिस अर्धसैनिक बल के साथ मिलकर नक्सली संगठनों के कमांडरों और उनके मददगार के खिलाफ कार्रवाई करती है।

सीआरपीएफ के डीआईजी संजय कुमार, गया एसएसपी राजीव मिश्रा और 159, बटालियन के कमांडेंट डा.निशित कुमार की रणनीति इस मोर्चे पर काफी कारगर साबित हुआ है।

अपर महानिदेशक, अभियान सुशील एम खोपडे ने गुरुवार को बताया कि बिहार पुलिस के राडार पर ऐसे नक्सली कमांडर है जो अवैध वसूली और नाजायज तरीके से धन उगाही कर करोड़ों रुपए की चल-अचल संपत्ति बनाई है। एडीजी, अभियान सुशील एम खोपडे के अनुसार पांच कुख्यात नक्सली कमांडर और उनके परिजनों की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है।

उन्होंने बताया कि जमुई का कुख्यात नक्सली कमांडर पिंटू राणा की चल-अचल संपत्ति को जब्त करने के लिए प्रर्वतन निदेशालय को सूची सौंपी गई है।


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