आजीवन भीड़ में ही रहे और हमेशा भीड़ पीछे चली, पंचतत्व में विलीन हुए रघुवंश बाबू

आजीवन भीड़ में ही रहे और हमेशा भीड़ पीछे चली, पंचतत्व में विलीन हुए रघुवंश बाबू

हाजीपुर: विचारों में स्पष्टता, जीवन में सादगी, व्यक्तित्व में समाज समेटे बेबाक राजनीति की हिम्मत रखने वाले दिग्गज समाजवादी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह आज शाम पंचतत्व में विलीन हो गए।

आजीवन खेत-खलिहान और समाज को जीते रहे रघुवंश बाबू के पार्थिव शरीर का काफिला सोमवार को जब उनके पैतृक गांव वैशाली जिले के शाहपुर से पंद्रह किलोमीटर दूर हसनपुर में गंगा घाट के लिए निकला तो जनसैलाब का उमड़ना आश्चर्यजनक नहीं था क्योंकि वह आजीवन भीड़ में ही रहे और हमेशा भीड़ उनके पीछे चली।

रघुवंश बाबू के साथ हमेशा उमड़ने वाला जनसैलाब उनका अपना समाजवाद ही तो था, जो विधायक, सांसद और केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद गांवों के हर सुख-दुख से जुड़े रहने से पनपा था। वह गांव के थे और गांव उनमें बसता था, आज अंतिम यात्रा में भी उनके पीछे गांव का गांव उमड़ पड़ा।

ऐसा लगा कि रघुवंश बाबू हमेशा की तरह अपनी अंतिम यात्रा में भी एक-एक व्यक्ति से मिलना चाहते हों, तभी तो उनको गंगा घाट पहुंचने में शाम हो गई, जहां उनके छोटे पुत्र शशि शेखर ने उन्हें मुखाग्नि दी।

हसनपुर घाट पर राजकीय सम्मान के साथ पूर्व केंद्रीय मंत्री को विदाई दी गई। मुखाग्नि से पूर्व पुलिस के जवानों और अधिकारियों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। अंत्येष्टि में बिहार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार, सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत बड़ी संख्या में कई राजनीतिक दलों के नेता एवं कार्यकर्ताओं के अलावा समाजसेवी और स्थानीय लोग शामिल हुए।

अंत्येष्टि में उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा देने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पुख्ता प्रबंध किये गये थे।

विश्व के प्राचीनतम गणराज्य और महात्मा बुद्ध की पावन धरती वैशाली (लिच्छवी) से समाजवाद का झंडा बुलंद करने वाले रघुवंश बाबू का रहन-सहन और जीवनशैली हमेशा निर्लिप्त रही। धोती-कुर्ता और गमछा रखने वाले रघुवंश बाबू का आजीवन कोई स्थाई निवास नहीं रहा।

किराये के मकान से राजनीतिक गतिविधियों का संचलान होता रहा। चना-चबेना-भूंजा वह ऐसे खाते जैसे उसके आगे सारे पकवान फींके हो। सादा जीवन उच्च विचार, यही थी उनकी पहचान।


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