नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में कुलपतियों एवं निदेशकों की भूमिका अहम : निशंक

नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में कुलपतियों एवं निदेशकों की भूमिका अहम : निशंक

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने के लिए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों एवं निदेशकों का विशेष आह्वान किया।

निशंक ने उच्च शिक्षा में `राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कार्यान्वयन` पर कुलाध्यक्ष सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि नीति निर्माण एक मूलभूत एवं नीतिगत विषय है और नीति क्रियान्वयन रणनीतिक विषय है। उन्होंने कहा कि इन दोनों के बीच सबसे अहम रोल लीडरशिप का होता है, ऐसी लीडरशिप जो नीति को ज़मीन पर उतार सके।

निशंक ने कहा कि यहां पर उपस्थित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों एवं निदेशकों से हम अपेक्षा रखते हैं कि भारतीय शिक्षण प्रक्रिया का विकेंद्रीकरण और सशक्तिकरण उनके माध्यम से होगा और शिक्षा की नई लहर भारत के हर छात्र और हर कोने तक पहुंचेगी।

उन्होंने इस ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में जुड़े सभी लोगों को बताया कि राष्ट्रपति कोविंद की प्रेरणा से ‘उच्च शिक्षा को रूपांतरित करने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 की भूमिका’ पर 7 सितम्बर को राज्यपालों का सम्मेलन आयोजित हुआ था जिसमें राज्यपाल एवं उपराज्यपाल, विभिन्न राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ-साथ राज्य-विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, राजभवन तथा विभिन्न राज्यों तथा संघ शासित प्रदेशों के उच्चतर शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव तथा सचिव ने भाग लिया और नीति के सफल कार्यान्वयन से जुड़े पहलुओं पर अपने विचार रखे।

सभी कुलपतियों एवं निदेशकों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, "विश्वविद्यालय का कुलपति या संस्थान के निदेशक होने से पहले आप सभी एक शिक्षक, एक मार्गदर्शक हैं। शिक्षक इस नीति का वह टूल है जिस पर पूरी नीति का कार्यान्वयन निर्भर करता है. एक ओर छात्र जहां केंद्र बिंदु हैं तो शिक्षक उसका फोकल पॉइंट हैं।

एक शिक्षक ही है जो छात्र को कौशल भी प्रदान करता है और कुशल भी बनाता है। आजीवन सीखने- सिखाने की प्रक्रिया प्रक्रिया में शिक्षक स्वयं भी शिक्षित होता है और छात्र को भी सिखाता है। वह मार्ग नहीं खोजता बल्कि छात्रों में यह क्षमता पैदा करता है कि वें अपना मार्ग स्वयं ढूंढे।”

निशंक ने कहा, आपको अपने यूनिवर्सिटी, संस्थान या अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी क्षेत्रों में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए एक्शन प्लान बनाने की जरूरत है। न केवल एक्शन प्लान बल्कि उस एक्शन प्लान को एक टाइमलाइन से जोड़कर, कैसे क्रियान्वित किया जा सकता है, इस पर काम करने की जरूरत है। हम विश्वविद्यालय, संस्थानों की ऑटोनॉमी (स्वायत्तता), उनके प्रशासन, उनके सशक्तिकरण और विकेंद्रीकरण के लिए प्रतिबद्ध हैं।

इस ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाने वाली समिति के प्रमुख डॉ कस्तूरीरंगन, आईआईआईटी परिषद के स्थायी समिति के अध्यक्ष डॉ के राधाकृष्णन, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के ड्राफ्टिंग समिति के सदस्य प्रो.वसुधा कामत, प्रो. मंजुल भार्गव जी, यूजीसी के अध्यक्ष प्रो. डी. पी. सिंह, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्दे, केंद्रीय विश्वविद्यालयों, भारतीय प्राद्योगिकी संस्थानों, राष्ट्रीय प्राद्योगिकी संस्थानों, तथा योजना एवं वास्तुकला संस्थाओं के निदेशक तथा कुलपति गण इत्यादि भी मौजूद थे।


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