दिखने लगा है इकोनॉमी में सुधार, लेकिन अभी करना होगा लंबा इंतजार: रिपोर्ट

दिखने लगा है इकोनॉमी में सुधार, लेकिन अभी करना होगा लंबा इंतजार: रिपोर्ट

नई दिल्ली: कोरोना महामारी के बाद अब देश की इकॉनमी सुधार की तरफ जाती दिख रही है। इसको लेकर तमाम पॉजिटिव रिपोर्ट सामने आ रही हैं। हालांकि सुधार के तमाम संकेतक फिलहाल काफी कमजोर हैं।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, `अभी तक के सबसे कठिन लॉकडाउन के कारण छह महीने की दिक्कतों के बाद अर्थव्यवस्था के लिये कुछ अच्छी खबरें हैं।

ऐसा अनुमान है कि यदि सरकार ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिये तत्काल कोई कदम नहीं उठाया तो सितंबर तिमाही में 13.5 प्रतिशत और चालू वित्त वर्ष में करीब 9.5 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।

पएमआई इंडेक्स में तेज सुधार देखने को मिला है। यह सूचकांक अगस्त में 52 था। जो सितंबर में 56.8 पर पहुंच गया। यह आठ साल की सबसे बड़ी तेजी है। जीएसटी कलेक्शन पिछले साल सितंबर की तुलना में 3.8 प्रतिशत बढ़कर 95.480 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

यह अगस्त 2020 की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक रहा। पैसेंजर वीइकल की बिक्री में भी 31 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गयी है। रेलवे माल ढुलाई में भी 15 प्रतिशत तेजी आयी है।

छह महीने के अंतराल के बाद वस्तुओं के निर्यात में भी 5.3 प्रतिशत की तेजी आई है। रेटिंग एजेंसी ने कहा, `हालांकि ऐसे संकेत हैं कि यह सुधार नरम है। दूसरी तिमाही के दौरान पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में नयी परियोजनाओं पर पूंजीगत व्यय में 81 फीसदी की गिरावट आयी है।

इससे निवेश में लगातार गिरावट आने का पता चलता है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी।

उसने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि बेहतर मानसून और खरीफ फसल की अच्छी पैदावार से कृषि कारोबार की धारणा काफी अच्छी बनी हुई है। हाल ही में शुरू किए गए कृषि सुधारों के साथ सरकार की ग्रामीण आय बढ़ाने की ओर ध्यान दिये जाने से कृषि आय में वृद्धि होने की संभावना है।

उस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बावजूद ग्रामीण परिवारों की आय की स्थिति सामान्य बनी हुई है।

इसके साथ विभिन्न क्षेत्रों में दी गई नकदी सहायता के साथ साथ बम्पर फसल होने से विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत भारी मात्रा में रबी फसलों की खरीद से कृषि आय की स्थिति को समर्थन मिला है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मनरेगा और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के माध्यम से सरकारी सहायता में वृद्धि हुई है। जिससे ग्रामीण आय पर नकदी दबाव कम करने और रोजगार सृजन में मदद मिली है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार द्वारा लॉकडाउन में कृषि गतिविधियों को छूट देने का सकारात्मक असर हुआ है।


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