डायबिटीज के मरीजों को नेत्रहीनता से ‎मिलेगी राहत, बना कॉन्टैक्ट लेंस

डायबिटीज के मरीजों को नेत्रहीनता से ‎मिलेगी राहत, बना कॉन्टैक्ट लेंस

नई दिल्ली : डायबिटीज के मरीजों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी आंखों की रोशनी भी चली जाती है।

ले‎किन अब विशेषज्ञों ने अंधेरे में चमकने वाले कॉन्टैक्ट लेंस विकसित किए हैं, जो डायबिटीज के मरीजों को नेत्रहीनता से राहत दिलांएगे।

अमेरिका के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा इलाज विकसित किया है, जिसमें दर्द की गुंजाइश न के बराबर है।

बता दें ‎कि यह इलाज ग्लो इन द डार्क कॉन्टैक्ट लेंस है। हालां‎कि दुनिया भर में लाखों लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और उन्हें नेत्रहीनता, डायबिटिक रेटिनोथैरेपी का खतरा है।

बता दें ‎कि इस समस्या के लिए अभी जो इलाज उपलब्ध है, वह थोड़ा तकलीफदेह है। इसमें आईबॉल में लेजर और इंजेक्शन का उपयोग किया जाता है।

मधुमेह की वजह से पूरे शरीर में खून पहुंचाने वाली नसों को नुकसान होता है। आंखों की नसों को नुकसान से रोशनी जाने की समस्या होती है, क्योंकि रेटीना की नर्व सेल्स में खून का प्रवाह कम हो जाता है और वे खत्म होने लगती हैं।

वहीं रेटीना में नए नर्व सेल्स भी बनते हैं। लेकिन डायबिटीज के मरीजों के रेटीना में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं होने से ये कोशिकाएं सही से विकसित नहीं हो पातीं और आंखों के अंदर प्लाज्मा का स्त्राव होने लगता है।

इसकी वजह से उनकी आंखों की रोशनी चली जाती है। ले‎किन अब नया लेंस इस तरह डिजाइन किया गया है जिससे रात को रेटीना की ऑक्सीजन की मांग कम हो जाती है।

इसके लिए आंखों की रॉड कोशिकाओं को नया लेंस स्वयं मामूली रोशनी देता है। यह प्रक्रिया पूरी रात चलती है। इसके लिए लेंस में कलाई में पहनी जाने वाली घड़ी की तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।


ख़बरें दबाव में हमेशा आपके हितों से समझौता करती रहेंगी। हमारी पत्रकारिता को हर तरह के दबाव से मुक्त रखने के लिए आर्थिक मदद करें।

HELP US

news aroma