देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार दुरुस्त करने उद्योगपतियों की सरकार से राहत की गुहार

देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार दुरुस्त करने उद्योगपतियों की सरकार से राहत की गुहार

नई दिल्ली : देश की अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए देश के उद्योगपतियों की बजट से पूर्व राहत की उम्मीद है। वैश्विक और घरेलू कारकों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार कुछ वक्त से धीमी पड़ी हुई है।

जिसके कारण प्रमुख उद्योगपतियों ने रोजगार सृजन के लिए कदम उठाने, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाने एवं कृषि क्षेत्र के अनुकूल नीतियों के निर्माण की अपील की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2020-21 का आम बजट पेश करेंगी।

अर्थव्यवस्था को लेकर भारत की चिंताओं के बीच वैश्विक आर्थिक स्थिति भी बेहतर नहीं है। अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव का असर पूरी दुनिया पर देखा जा रहा है। दुनिया की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं अधिक संकट में दिख रही हैं।

वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर करीब तीन फीसदी पर है। यह पिछले साल की तुलना में आधा फीसदी कम है। वैश्विक व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित है।

दुनिया की सबसे तेज गति से आगे बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है। चालू वित्त वर्ष की सितंबर 2019 में समाप्त दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर घटकर 4.5 फीसद रह गई। यह मार्च 2013 के बाद सबसे निचला स्तर है।

देश में ऑटो मोबाइल से लेकर टिकाऊ उपभोक्ता उत्पादों और रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं तक की मांग में भी गिरावट दर्ज की जा रही है। निजी उपभोग में भी सुस्ती है।

इस सबके बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्ष 2024-25 तक देश को पाँच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य तय किये हुये हैं।

वर्तमान स्थिति में इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल प्रतीत हो रहा है क्योंकि अभी भारतीय अर्थव्यवस्था 2.9 लाख करोड़ डॉलर की है।

5 लाख करोड़ डॉलर पर पहुंचने के लिए जीडीपी वृद्धि दर को कम से कम 11 फीसदी पर ले जाना होगा जो वर्तमान आर्थिक माहौल में संभव होता नहीं दिख रहा।

इन परिस्थतियों के बीच देश के प्रमुख उद्योगपतियों ने बजट को लेकर अपनी राय रखी है। टीवीएस समूह के अध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन ने कहा कि बजट में रोजगार सृजन पर ध्यान दिया जाना चाहिये।

उन्होंने कहा कि रोजगार सृजन सबसे प्रमुख मुद्दों में से एक है। इसके साथ ही विकास पर भी ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है।

हीरो एंटरप्राइज के अध्यक्ष सुनील कांत मुंजाल ने कहा कि राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करने पर ध्यान दिये बगैर सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर पर व्यय को बढ़ाना चाहिये क्योंकि इससे जहां इंफ्रा को बहुत लाभ होगा वहीं रोजगार सजृन के अवसर पर बनेंगे।

डीसीएम श्रीराम के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रबंध निदेशक अजय एस श्रीराम ने सरकार से कृषि क्षेत्र पर ध्यान देने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि इस बजट में कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखकर कदम उठाये जाने की उम्मीद है क्योंकि यह क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। देश के जीडीपी में इसका योगदान कम हो रहा है।

उन्होंने कृषि क्षेत्र के निर्णय को लागू करने के लिए सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों का जीएसटी परिषद की तरह का एक संगठन बनाये जाने की भी आवश्यकता बताई है।


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