बिहार में RTI कार्यकर्ताओं की हत्या का सिलसिला जारी, 40 दिनों में दो हत्याएं, किसी भी हत्या में गिरफ्तारी नहीं

बिहार में RTI कार्यकर्ताओं की हत्या का सिलसिला जारी, 40 दिनों में दो हत्याएं, किसी भी हत्या में गिरफ्तारी नहीं

पटना : बिहार में पिछले 40 दिनों में दो आरटीआई कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गयी है। पिछले महीने पटना जिला के बिक्रम में पंकज कुमार सिंह की हत्या की गयी और इस महीने की 7 तारीख को बेगूसराय में श्याम सुन्दर कुमार सिन्हा को मौत के घाट उतारा गया।

शव को कीचड़ में फ़ेंक दिया गया और इस हत्या को आत्महत्या बनाने के लिए वहां पर एक परचा सुसाइड नोट के तौर पर छोड़ दिया गया।

बिहार में पिछले नौ वर्षों में 18 ऐसे लोगों की हत्या कर दी गयी है जो सूचना के अधिकार के तहत सरकारी कार्यालयों से सूचना मांगते हैं और नहीं मिलने पर सूचना आयोग का दरवाज़ा खटखटाते हैं।

जैसा कि राज्य के चर्चित आरटीआई कार्यकर्त्ता शिव प्रकाश राय का कहना है कि न ही हत्याओं का सिलसिला रुक रहा है, न किसी हत्यारे की गिरफ़्तारी हुई और अब न ही आयोग में कोई कम आगे बढ़ रहा है।

सूचना का अधिकार कानून बनने के बाद बिहार में पहली हत्या 2010 में बेगूसराय में शशिधर मिश्र की हुई थी परन्तु आज तक उसमें कुछ भी नहीं हुआ और नौ साल बाद भी पुलिस किसी एक हत्यारे तक नहीं पहुँच सकी।

यही हाल अधिकतर मामलों में रहा और अगर कोई गिरफ़्तारी हुई भी तो मुख्य आरोपी कभी गिरफ्तार नहीं हुआ। राय ने बताया कि 2017 में आरटीआई कार्यकर्त्ता राम बिलास सिंह की लखीसराय में हत्या कर दी गयी थी।

पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया लेकिन मुख्य आरोपी बमबम सिंह जिस पर राज्य पुलिस ने पांच लाख रूपये का इनाम घोषित किया था आज तक गिरफ्तार नहीं हो सका। उसके भय से सिंह का परिवार बिहार से पलायन कर चुका है।

केवल इतना ही नहीं कि अधिक तेज़ तर्रार कार्यकर्ताओं की हत्या हो रही है बल्कि ऐसे लोगों पर झूठे मुक़दमे भी सरकारी अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत से किये जा रहे हैं यहाँ तक कि अधिकारी स्वयं भी केस दर्ज करके उन्हें जेल की हवा खिला रहे हैं।

मनु महाराज, जो अभी मुंगेर में डीआईजी हैं , जब रोहतास के एसपी थे तब नारायण गिरी नामक कार्यकर्त्ता ने कुछ सूचनाएँ मांगी थीं और सूचना आयोग ने सूचनाएँ नहीं देने के चलते उन पर 2013 में 25 हजार रुपये का दंड लगाया था।

महाराज का बाद में तबादला हुआ लेकिन नटवार, सासाराम के नारायण गिरी से खुन्नस जारी रही और राय का आरोप है कि उनके कहने पर ही गिरी के खिलाफ एक महिला ने छेड़खानी का आरोप लगाया जिसको वह जानते भी नहीं थे और गिरी को गिरफ्तार कर लिया गया।

उसी तरह सारण के बलबीर कुमार सिंह पर मार्च 2018 में एक केस दायर हुआ। वह जन वितरण प्रणाली में हो रही धांधली के खिलाफ आवाज़ उठाते रहते थे और इस सिलसिले में सूचना का अधिकार के तहत सक्रिय थे।

जन वितरण प्रणाली के ठेकेदारों ने उनसे तंग आकर एक ऐसे आदमी से केस करवा दिया जो 50 किमी दूर बैठा था। सिंह को इस केस की कोई जानकारी भी नहीं लगी। पिछले महीने जब पुलिस वारंट लेकर उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची तब उन्हें इस मामले की जानकारी हुई।


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