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Thursday, April 15, 2021
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झारखंड में इंजीनियर की मौत के बाद ब्रह्मपुत्र मैटेलिक प्राइवेट लिमिटेड के गेट पर प्रदर्शन, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

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न्यूज़ अरोमा रामगढ़: झारखंड के बड़े इंडस्ट्रीज में शामिल ब्रह्मपुत्र मैटेलिक प्राइवेट लिमिटेड के गेट पर पिछले 20 घंटों से प्रदर्शन जारी है।

यह मामला प्लांट के अंदर हुए दुर्घटना में घायल हुए इंजीनियर की मौत से जुड़ा हुआ है।

बुधवार की दोपहर इंजीनियर धर्मेंद्र सिंह के भाई राम सिंह ने प्लांट प्रबंधन पर लापरवाही के साथ-साथ बेरुखी से पेश आने का भी आरोप लगाया है।

उन्होंने बताया कि धनबाद जिले के जामाडोबा के रहने वाले धर्मेंद्र बीएमएल में बतौर इंजीनियर काम कर रहे थे।

3 दिसंबर की रात जब प्लांट में हादसा हुआ है तो उस वक्त 7 इंजीनियर के साथ-साथ कई कामगार भी घायल हुए थे।

लेकिन धर्मेंद्र के साथ इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई। प्लांट प्रबंधन ने भी ध्यान नहीं दिया।

जिसकी वजह से मंगलवार को उसकी मौत हो गई। धर्मेंद्र का परिवार सड़क पर आ गया है।

लेकिन प्लांट प्रबंधन इस बेरुखी से पेश आ रहा है कि जैसे धर्मेंद्र कभी उनका कर्मचारी रहा ही नहीं हो।

उन्होंने बताया कि मंगलवार की रात से वे लोग प्लांट गेट पर धर्मेंद्र की लाश रखकर बैठे हुए हैं। लेकिन प्रबंधन की ओर से किसी ने भी उनके साथ बात नहीं की।

25 लाख मुआवजा और पत्नी को नौकरी की है मांग

धर्मेंद्र के परिजनों ने बीएमएल प्रबंधन के समक्ष 2500000 रुपए के मुआवजे की मांग रखी है।

साथ ही पत्नी दीपांजलि को नौकरी देने और धर्मेंद्र के पुत्र के बालिग होने तक पढ़ाई का पूरा खर्च वहन करने की बात कही है। हालाकी प्लांट प्रबंधन ने उनकी इन मांगों पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की है।

मृतक धर्मेंद्र के परिजनों का कहना है कि अब धर्मेंद्र की पत्नी और बच्चे के समक्ष भारी आर्थिक संकट उत्पन्न होने वाला है। इसका ख्याल प्लांट प्रबंधन को रखना चाहिए।

इलाज में लापरवाही की बात को प्लांट प्रबंधन ने नकारा

बीएमएल प्लांट प्रबंधन की ओर से अंजनी सिंह ने बताया कि 3 दिसंबर को कीलन पाइप फटने से हादसा हुआ था। जिसमें कई इंजीनियर घायल हो गए थे ।

उन लोगों को आनन-फानन में प्राथमिक उपचार के बाद रांची के देवकमल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां बेहतर चिकित्सक सभी का इलाज कर रहे हैं।

आज भी वहां इलाजरत लोग खतरे से बाहर हैं। अंजनी सिंह ने कहा कि इलाज में प्रबंधन की ओर से कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।

हॉस्पिटल का पूरा खर्च प्रबंधन वहन कर रहा है। यहां तक की घायल लोगों के परिजनों को अस्पताल लाने और घर पहुंचाने के लिए भी गाड़ियों की व्यवस्था की गई है।

इलाज के दौरान धर्मेंद्र सिंह की मौत बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

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