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Friday, April 16, 2021
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वायुसेना के लिए बनेंगीं छह ‘आसमानी आंखें’

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नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) भारतीय वायुसेना के लिए आसमान में छह नई ‘आंखें’ बनाने जा रहा है जो चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर निगरानी क्षमताओं को और बेहतर करेंगीं।

स्वदेशी रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए डीआरडीओ ​​एयर इंडिया से 6 विमान लेगा और उनमें एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम लगाकर वायुसेना के लिए विकसित करेगा।

ऐसा होते ही भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने के साथ ही यह क्षमता रखने वाले शीर्ष पांच देशों में शामिल हो जाएगा।

दुश्मन के विमान पर नजर रखने के लिए ​​एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (अवाक्स) की यह योजना कई सालों से चल रही है।

हवाई चेतावनी और नियंत्रण (एईडब्ल्यू एंड सी) से लैस दो साल पहले एक विमान तैयार करके गणतंत्र दिवस की परेड में प्रदर्शित भी किया गया था।

इस सिस्टम में 240 डिग्री कवरेज वाला रडार लगाया गया था जबकि वायुसेना को 400 किलोमीटर तक 360 डिग्री कवरेज हासिल करने वाला अवाक्स से लैस विमान की जरूरत है।

अब 10,500 करोड़ रुपये की परियोजना के तहत डीआरडीओ छह विमानों को एयर इंडिया के बेड़े से हासिल करेगा और उनमें एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (अवाक्स) लगाकर वायुसेना के लिए विकसित करेगा।

यह विमान मिशन के दौरान दुश्मन के इलाके के अंदर 360 डिग्री निगरानी क्षमता देंगे।

उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस परियोजना को मंजूरी दे देगी।

भारतीय वायुसेना के पास ​इस समय ​इज़राइल और रूस से खरीदे गए तीन ​फाल्कन आवाक्स सिस्टम हैं, जिन​ पर ​इज़राइली रडार ​लगे हैं​।​ यह ​​400 किलोमीटर तक 360 डिग्री कवरेज देने में सक्षम है​​।

इस तरह के चीन के पास 20 से ज्यादा और पाकिस्तान के पास आठ सिस्टम हैं।

चीन का सिस्टम 470 किलोमीटर की दूरी तक 60 से ज्यादा विमानों को ट्रैक कर सकता है।

पाकिस्तान के पास चार स्वीडिश और चार चीनी विमान हैं। इसलिए इस मामले में भारत को फिलहाल चीन और पाकिस्तान से काफी पीछे माना जाता है।

भारत ने पहले छह एयरबस 330 परिवहन विमान यूरोपीय फर्म से हासिल करने की योजना बनाई थी जिसमें डीआरडीओ को अवाक्स लगाना था।

अब एयर इंडिया के बेड़े से ​6 विमान​ लेकर उनमें अवाक्स सिस्टम लगाने की परियोजना का मतलब है कि भारत ने यह इरादा छोड़ दिया है।

सूत्रों ने कहा कि छह ​नई ‘आसमानी आंखों’​ ​को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर प्रभावी निगरानी के लिए तैनात ​किया जायेगा।

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