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Friday, April 16, 2021
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भोजपुर के एकौना घाट गांव में बोले जियर स्वामी जी- जन्म के साथ ही तीन ऋणों से दब जाता मनुष्य

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आरा: भोजपुर जिले के बड़हरा प्रखण्ड के एकौना गांव में संत श्री लक्ष्मी प्रपन्न जियर स्वामी जी महाराज के सानिध्य में हजारो भक्तों,श्रद्धालुओ की भीड़ के साथ भव्य श्री सीताराम विवाह महोत्सव का आयोजन हुआ।

श्री सीताराम विवाह महोत्सव में भाग लेने गंगा के पवित्र तट पर बसे सुरम्य गांव एकौना में दूर-दूर से भक्त और श्रद्धालु पहुंचे हुए हैं।

समारोह में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुई। इस दौरान काशी,मथुरा,बनारस आदि कई धर्म स्थलों से आये आचार्यो ने मंत्रोच्चार के बीच श्री सीताराम विवाह महोत्सव का आयोजन सम्पन्न कराया।

पूरा गांव भक्ति के माहौल में डूबा रहा और इस भक्ति की खुशबू दूर दराज के इलाकों तक भी फैली।जिले के बड़हरा प्रखण्ड के गंगा तटीय इलाके में बसे गांव एकौना में श्री सीताराम विवाह महोत्सव के अवसर पर हाथी,घोड़े,ऊंट भी खूब पहुंचे।

एकौना में विवाह महोत्सव की कमान प्रभु श्री राम की शैक्षणिक भूमि बक्सर के चरित्रवन के पीठाधीश्वर श्री अयोध्यानाथ स्वामी ने संभाल रखा था।

शनिवार की देर रात तक आयोजित इस समारोह में एकौना गांव के युवा नेता और पूर्व जिला पार्षद बीर बहादुर सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एकौना गांव में बाहर से पहुंचे हजारो स्त्री पुरुष श्रद्धालुओ की सुविधा को लेकर उन्होंने व्यापक इंतजाम किए हैं। पूरा एकौना गांव धर्म स्थल में तब्दील हो गया है।

एकौना में रविवार को भी श्री लक्ष्मी प्रपन्न जियर स्वामी जी महाराज का दर्शन करने भक्तों की भीड़ जुटी हुई है। इस दौरान एकौना पहुंचे देश के महान संत श्री लक्ष्मी प्रपन्न जियर स्वामी जी महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहा कि मनुष्य के जन्म लेते ही वे तीन तरह के ऋण से दब जाते हैं।

माता पिता का कर्ज,ऋषि का कर्ज और देवताओं का कर्ज जन्म के साथ ही मनुष्य पर चढ़ जाता है। इन तीनों कर्ज को ही पितृ ऋण, ऋषि ऋण और देव ऋण कहा जाता है।

जियर स्वामी जी महाराज ने कहा कि माता पिता के तेज से जन्म लेने वाले मनुष्य को माता पिता के कड़े स्वभाव को भी बर्दास्त करना चाहिए क्योंकि उन्होंने ने भी बड़े बड़े कष्ट सहकर उन्हें धरती पर लाया है।

उन्होंने कहा कि पत्नी के प्रति स्नेह रखिये किन्तु माता पिता का ध्यान जरूर रखिये क्योंकि माता पिता की वजह से ही पत्नी का स्नेह मिल रहा है। उन्होंने कहा कि माता पिता को दुख देने वाले, मारपीट करने वाले, गाली गलौज करने वाले को साक्षात इंद्र भी आकर नही बचा सकते हैं।ऐसे लोग नरक के भागी होते हैं।

पितृ ऋण से उबरने का उपाय भी बताया और कहा कि बड़े होकर शादी विवाह करके संतान पैदा करें और उसे अच्छे संस्कार दें तो पितृ ऋण से उबर सकते हैं।

ऋषि ऋण से उबरने के लिए उन्होंने कहा कि ऋषियो को भोजन कराकर,पूजा पाठ करके और हवन आदि करके ऋषि ऋण से मुक्त हो सकते हैं। एकौना गांव इनदिनों भक्ति और श्रद्धा के माहौल में डूबा हुआ है और यहां भक्तों के आने का सिलसिला जारी है।

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