राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, बताया ‘हम दो हमारे दो’ वाली सरकार

नई दिल्ली: संसद में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा, ‘हम करते हैं, हमरे’ से, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी खुद अपनी मां, अपनी बहन और अपने बहनोई का जिक्र कर रहे थे।

उन्होंने बजट में एक भी शब्द नहीं कहा। लोकसभा में नए कृषि कानूनों पर हाईप्रोफाइल ड्रामा हुआ।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार को हम दो हमारे दो की सरकार बताया।

कहा कि इन कानूनों का मुख्य उद्येश्य मंडियों, किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को खत्म कर दो लोगों को लाभ पहुंचाने का है।

उन्होंने कहा कि किसान, छोटे व्यापारी, छोटे दुकानदार एक इंच पीछे नहीं हटेंगे। ये इस सरकार को सत्ता से बेदखल कर देंगे।

भाजपा बोली राहुल के कहने का मतलब, दीदी-जीजाजी और उनके दो बच्चे

जवाब में कृषि राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि हम दो हमारे दो का असली अर्थ दीदी-जीजाजी और उनके दो बच्चे हैं।

राहुल ने कहा कि पीएम मोदी ने बार-बार कहा कि विपक्ष इन कानूनों के इंटेंट और कंटेंट पर बात नहीं कर रहा।

उन्हें खुश करने के लिए मैं तीनों कानूनों के इन्हीं पहलुओं पर बात करुंगा।

उन्होंने सालों पूर्व परिवार नियोजन संबंधी एक नारा हुआ करता था, हम दो हमारे दो।

हमारे देश को हम दो हमारे दो, मतलब चार लोग चला रहे हैं। ये लोग कौन हैं पूरा देश इन्हें जानता है।

कंटेंट-इंटेंट पर रखी बात

राहुल ने कहा कि इन कानूनों का कंटेंट है कि कोई भी व्यक्ति देश में कहीं भी कितनी भी मात्रा में अनाज, फल और सब्जी खरीद सकता है।

दूसरे कानून का कंटेंट यह है कि कोई भी व्यक्ति कितनी भी मात्रा में इनका भंडारण कर सकता है।

तीसरे कानून का कंटेंट है कि अगर किसान ने अनाज, फल और सब्जियों की कीमत मांगी तो अदालत नहीं जाने दिया जाएगा।

राहुल ने कहा कि मतलब साफ है।

हम दो हमारे दो ही कितनी भी मात्रा में अनाज, फल, सब्जियां खरीद सकेंगे, इनका भंडारण कर सकेंगे। जमाखोरी को छूट मिलेगी। उपभोक्ताओं को इसकी कीमत चुकानी होगी।

किसान, छोटे दुकानदार, छोटी व्यापारी निशाने पर

राहुल ने कहा कि कृषि कानून के जरिए हम दो हमारे दो की नीति का पालन नई बात नहीं है।

इससे पहले सरकार ने नोटबंदी, गब्बर सिंह टैक्स मतलब जीएसटी और कोरोना महामारी के दौरान यही किया।

नोटबंदी के जरिए गरीबों का पैसा निकाल कर उद्योगपतियों को दिया।

जीएसटी के तहत छोटे व्यापारियों, छोटे दुकानदारों को खत्म किया।

कोरोना महामारी के दौरान गरीबों-मजदूरों को ट्रेन-बस का टिकट नहीं मिला, मगर उद्योगपतियों को दस लाख करोड़ का लाभ पहुंचाया गया।

इस सरकार की हम दो हमारे दो की नीति ने देश की रीढ़ तोड़ दी है।

किसान, छोटे व्यापारी और छोटे दुकानदार खत्म हो गए हैं।

इस कारण यह देश वर्तमान में रोजगार पैदा नहीं कर रहा, भविष्य में भी रोजगार पैदा नहीं कर पाएंगे।

इस दौरान राहुल ने आम बजट पर बोलने से इंकार करते हुए किसान आंदोलन में विभिन्न कारणों से जान गंवाने वाले किसानों के लिए दो मिनट का मौन रखा।

उन्होंने कहा कि विपक्ष किसानों के मुद्दों पर अलग से चर्चा करना चाहता था।

सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई। आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों को श्रद्घांजलि देने पर सहमत नहीं हुई।

इसके विरोध में मैं आमबजट पर कुछ नहीं बोलूंगा। अपनी ओर से मृत किसानों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखूंगा।

रास्ता दिखा रहा है किसान आंदोलन

राहुल ने कहा कि यह सिर्फ किसानों का आंदोलन नहीं है। यह आंदोलन अंधेरे में टॉर्च दिखा रहा है। किसान एक इंच पीछे नहीं हटेंगे।

पूरा देश एक आवाज से ‘हम दो, हमारे दो’ के खिलाफ उठाने जा रहा है।  किसान एक इंच पीछे नहीं हटने वाला है।

  किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी, छोटे दुकानदार आपको हटा देंगे। आपको हर हाल में कानून वापस लेना ही होगा।

मौन पर बिरला ने जताई आपत्ति

राहुल की ओर से अपनी ओर से मौन रखे जाने पर बिरला ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सदन चलाने की जिम्मेदारी उनकी है। सदन किसानों, जवानों और देश के नागरिकों का सम्मान करता है।

ऐसे में पार्टी के एक सदस्य द्वारा अपनी ओर से मौन रखना संसदीय परंपरा का अपमान है।

सरकार का पलटवार

राहुल के तत्काल बाद कृषि राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने राहुल और कांग्रेस पर पलटवार किया। ठाकुर ने कहा कि सदन और देश में कम रहने वाले राहुल झूठ की मशीन हैं। इनके सोच का खामियाजा पार्टी और देश को उठाना होगा।

अनुराग ने तंज भरे स्वर में कहा कि राहुल ने हम दो हमारे दो का हवाला दिया है।

इसका अर्थ दीदी-जीजाजी और उनके दो बच्चे हैं। अनुराग ने कहा कि इस देश में एक ही परिवार की 5 पीढियो ने दशकों राज किया। गरीबी हटाने को राजनीतिक जुमला बताया।

इनके लंबे कार्यकाल में गरीबी तो कम नहीं हुई मगर गरीब जरूर निपट गए।

अनुराग ने कहा कि जब इस देश में एक गरीब मां के बेटे ने बागडोर संभाली तो महज छह साल में सबसे अधिक संख्या में लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए।

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