श्रीमद् भागवत कथा ही कलयुग के प्रभाव से दूर कर सकती है: मां चैतन्य मीरा

Archana Ekka
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श्रीमद् भागवत कथा का द्वितीय दिवस उमड़ी आस्था की भीड़

रांची : चुटिया स्थित रामेश्वर लाल पोद्दार स्मृति भवन धर्मशाला में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस पावन अवसर पर सुप्रसिद्ध कथा वाचिका पूज्य मां चैतन्य मीरा ने अपने मधुर वचनों से भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान का अमृतपान कराया। कथा के दौरान मां चैतन्य मीरा ने राजा परीक्षित और कलयुग की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि किस प्रकार राजा परीक्षित को एक ऋषि के श्राप का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक घटना नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए एक गहरी सीख है। उन्होंने बताया कि कलयुग ने स्वर्ण में अपना स्थान बनाकर स्वयं राजा परीक्षित की बुद्धि को भ्रमित कर दिया, जिससे वे धर्म के मार्ग से विचलित हो गए।मां ने वर्तमान समय से इस कथा को जोड़ते हुए कहा कि आज के समाज में जो आपसी भेदभाव, गृह क्लेश, अशांति और मानसिक तनाव देखने को मिल रहा है, वह सब कलयुग के प्रभाव का ही परिणाम है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब मनुष्य अपने मूल धर्म और आध्यात्मिकता से दूर हो जाता है, तब उसके जीवन में अशांति और भ्रम उत्पन्न होता है।उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि इस कलयुग में भगवान का नाम, भक्ति और श्रीमद् भागवत कथा ही ऐसे साधन हैं, जो हमें इन नकारात्मक प्रभावों से बचा सकते हैं। यदि व्यक्ति अपने जीवन में भक्ति मार्ग को अपनाता है, प्रभु के प्रति सच्चा प्रेम और आस्था रखता है, तो उसका कोई भी अहित नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि आज के समाज के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि वह प्रभु से जुड़े, अन्यथा जीवन का वास्तविक कल्याण संभव नहीं है।मां चैतन्य मीरा ने आगे बताया कि उनके द्वारा नासिक स्थित आश्रम में तथा ऑनलाइन माध्यम से ध्यान एवं योग के नियमित शिविर आयोजित किए जाते हैं। इन शिविरों का उद्देश्य लोगों को मानसिक शांति प्रदान करना, जीवन की समस्याओं से उबारना तथा उन्हें एक स्वस्थ और संतुलित जीवन की ओर अग्रसर करना है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अब ये शिविर नासिक के अलावा अन्य स्थानों पर भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं से जूझ रही है।

ध्यान और योग के माध्यम से इन समस्याओं को दूर किया जा सकता है तथा जीवन में एकाग्रता और सकारात्मकता लाई जा सकती है। कार्यक्रम के मुख्य यजमान श्री रघुनंदन अग्रवाल, ऋषि अग्रवाल ने पूरे परिवार के साथ विधिवत पूजा अर्चन की, कार्यक्रम के अंत में समिति के सदस्यों द्वारा विधिवत आरती की गई, जिसमें उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भाग लिया। तत्पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया। पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का आनंद लेते नजर आए।यह सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनी हुई है, बल्कि समाज को आध्यात्मिक दिशा देने का कार्य भी कर रही है। इस अवसर पर-न्यास के सचिव फतेहचंद अग्रवाल, न्यास कोषाध्यक्ष राधे श्याम अग्रवाल, कमल कुमार अग्रवाल, ओम प्रकाश मोदी, अमित मुरारका, सुभाष पोद्दार, सांवरमल अग्रवाल, योगेंद्र पोद्दार, कैलाश केसरी, अनमोल सिंघानिया, पुलकित अग्रवाल, रेखा अग्रवाल, अनु पोद्दार, सहित कई गणमान्य लोग एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सनमार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।