Acquitted in Murder Case : रांची सत्र न्यायालय (Ranchi Sessions Court) ने एक पुराने हत्या मामले में अहम फैसला सुनाते हुए दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ ठोस और पुख्ता सबूत पेश करने में असफल रही।

यह मामला वर्ष 2018 में ओरमांझी थाना क्षेत्र में हुई मोइजुल अंसारी की गोली मारकर हत्या (Murder) से जुड़ा हुआ था। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
हत्या की घटना और प्राथमिकी
दरअसल, 9 जुलाई 2018 को मोइजुल अंसारी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के अगले दिन मृतक के पिता के बयान पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।
हालांकि, शिकायत में किसी भी व्यक्ति का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया था, जिससे शुरुआत से ही जांच कमजोर मानी जा रही थी।
जांच में बार-बार बदलाव
इस हत्याकांड की जांच के दौरान कई बार जांच अधिकारी बदले गए। सबसे पहले पीएन मुर्मू को जांच अधिकारी बनाया गया, लेकिन बाद में इंस्पेक्टर संतोष कुमार को केस की जिम्मेदारी दी गई।

उन्होंने जांच के दौरान कुछ गवाहों के बयान जरूर दर्ज किए, लेकिन जांच को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी साक्ष्य जुटाने में सफलता नहीं मिली।
मौके पर नहीं पहुंचे जांच अधिकारी
इसके बाद तत्कालीन थाना प्रभारी राज देव प्रसाद को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। लेकिन आरोप है कि उन्होंने मामले में कोई खास जांच नहीं की और यहां तक कि घटनास्थल पर भी नहीं गए।
उनके बाद इंस्पेक्टर श्याम किशोर महतो को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
आरोप पत्र तो दाखिल हुआ, पर सबूत नहीं
जांच के दौरान नरकोपी थाना द्वारा TPC के लिए पैसे वसूली के आरोप में गिरफ्तार सलीम अंसारी और मुकेश महतो को इस हत्याकांड में आरोपी बनाते हुए आरोप पत्र दाखिल किया गया।
हालांकि, ट्रायल के दौरान पुलिस अदालत में आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी।
अदालत का साफ संदेश
सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि मोइजुल अंसारी की हत्या गोली मारकर की गई थी, लेकिन जिन लोगों को आरोपी बनाया गया, उनके खिलाफ पुलिस के पास कोई मजबूत प्रमाण नहीं था।
इसी आधार पर दोनों आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया।




