National Seminar on Tribal life in DSPMU : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में आदिवासी जीवन पर आधारित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, DSPMU तथा उच्च एवं Technical Education Department, झारखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

संगोष्ठी का मुख्य विषय “21वीं सदी के हिंदी साहित्य (Hindi Literature) में अभिव्यक्त आदिवासी जीवन संदर्भ” रहा। देश के अलग-अलग राज्यों और नेपाल से आए विद्वानों, शोधार्थियों और छात्रों ने इसमें सक्रिय भागीदारी निभाई।
पहला सत्र: हिंदी कथा साहित्य में आदिवासी जीवन
संगोष्ठी के पहले सत्र का विषय “हिंदी कथा साहित्य में अभिव्यक्त आदिवासी जीवन संदर्भ” था। इस सत्र में वरिष्ठ साहित्यकारों ने अपने विचार साझा किए।
डॉ. पंकज मित्र ने कहा कि आदिवासी समाज आज अपनी पूरी रचनात्मकता के साथ हिंदी कथा साहित्य में उभरकर सामने आ रहा है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज में प्रकृति पर विजय की सोच नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना प्रमुख है।

नेपाल से आए सामाजिक कार्यकर्ता बेचन उरांव ने नेपाल के आदिवासी समुदायों की भाषाओं और संस्कृति पर मंडरा रहे खतरों की ओर ध्यान दिलाया।
वहीं, जर्मनी से ऑनलाइन जुड़े नेतराम पोडियाल ने जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के तुलनात्मक अध्ययन के माध्यम से वैश्वीकरण के प्रभावों पर प्रकाश डाला।
अध्यक्षीय वक्तव्य और रचनात्मक सुझाव
अध्यक्षीय वक्तव्य में Senior litterateur Ranendra Kumar ने सभी वक्तव्यों का सार प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भाषा का अत्यधिक शुद्धिकरण भी उसके लुप्त होने का एक कारण बन सकता है।
उन्होंने लेखकों को “डिकोलोनाइज” होकर सोचने, यथार्थवाद से आगे बढ़कर जादुई कल्पना से प्रेरित नई कृतियां रचने का सुझाव दिया।
दूसरा सत्र: सिनेमा और मीडिया में आदिवासी जीवन
दूसरे सत्र का विषय “हिंदी सिनेमा/मीडिया में अभिव्यक्त आदिवासी जीवन संदर्भ” रहा।
इस सत्र में डॉ. विनोद कुमार, डॉ. जनार्दन गोंड, प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह, निरंजन कुजूर और फिल्मकार पुरुषोत्तम कुमार ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सिनेमा और मीडिया में आदिवासी जीवन की प्रस्तुति, उसकी सीमाएं और संभावनाओं पर चर्चा की।
प्रतिभागिता और शोध पत्र वाचन
संगोष्ठी में कुल 300 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से लगभग 200 शोधार्थियों ने अपने शोध पत्रों का वाचन किया।
गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बंगाल, बिहार, झारखंड सहित नेपाल से भी प्रतिभागी शामिल हुए। संगोष्ठी में प्रस्तुत आलेखों को पुस्तकाकार प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया।
समापन और निष्कर्ष
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक नगाड़ा वादन से हुई और अतिथियों को शॉल व मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। मंच Operations Hindi Department के सहायक प्राध्यापकों ने किया।
समापन अवसर पर बताया गया कि संगोष्ठी से निकले निष्कर्षों को एक विशेष रिपोर्ट के रूप में समाज, राजनीति और संबंधित संस्थाओं तक भेजा जाएगा। कार्यक्रम में शिक्षक, शोधार्थी, छात्र और बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।




