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मनरेगा कानून के विरोध में 2 फरवरी को रांची में राज्यव्यापी जुटान

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Protest Against the MNREGA Act: मनरेगा के नए कानून के विरोध और इसे पूरी मजबूती से लागू करने की मांग को लेकर 2 फरवरी को रांची में राज्यभर के मनरेगा मजदूरों का बड़ा जुटान होने जा रहा है।

झारखंड नरेगा वॉच (Jharkhand NREGA Watch) के आह्वान पर आयोजित इस राज्य स्तरीय सभा में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के भी शामिल होने की जानकारी है।

यह कार्यक्रम राजधानी Ranchi के मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका (Bapu Vatika) में सुबह 11 बजे से शुरू होगा।

20 साल में मनरेगा ने बदली ग्रामीण तस्वीर

“हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो” के नारे के साथ करीब 20 वर्ष पहले लागू हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) ने करोड़ों मजदूरों को रोजगार और सम्मान दिया है।

मजदूर संगठनों का कहना है कि मनरेगा से गांवों में विकास को गति मिली, पलायन में कमी आई और दलित, आदिवासी व भूमिहीन परिवारों का आर्थिक सशक्तिकरण संभव हो पाया।

नए कानून पर मजदूर संगठनों की आपत्ति

आयोजकों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में VB-ग्रामीण (2025) कानून पारित कर मनरेगा को कमजोर कर दिया है।

उनका कहना है कि यह बदलाव मजदूरों के काम के अधिकार पर सीधा हमला है। नई व्यवस्था में रोजगार, बजट, मजदूरी और काम की अवधि से जुड़े फैसले पूरी तरह केंद्र सरकार के हाथ में चले जाएंगे।

गरीब और आदिवासी परिवारों पर असर की आशंका

मजदूर संगठनों का दावा है कि इस कानून का सबसे ज्यादा असर गरीब, दलित और आदिवासी परिवारों पर पड़ेगा।

गांवों में काम की कमी होने से पलायन बढ़ेगा, बाल मजदूरी जैसी समस्याएं सामने आएंगी और बच्चों के शिक्षा से बाहर होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

गांव-गांव में ग्राम सभाएं, प्रस्ताव पारित

इसी मुद्दे को लेकर राज्यभर के गांवों में ग्राम सभाएं आयोजित की जा रही हैं। इन सभाओं में प्रस्ताव पारित कर नए कानून के विरोध और मनरेगा को मजबूत करने की मांग उठाई जा रही है। मजदूर संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन गांव से लेकर राजधानी तक आवाज बुलंद करेगा।

सभा से उठेगी मजबूत मांग

2 फरवरी की सभा के माध्यम से यह मांग की जाएगी कि मनरेगा को खत्म नहीं, बल्कि और सशक्त किया जाए। मजदूरों का काम का अधिकार सुरक्षित रहे और ग्रामीण विकास की प्रक्रिया लगातार चलती रहे, यही इस जुटान का मुख्य उद्देश्य है।

यह राज्यव्यापी जुटान मनरेगा (Statewide mobilization under MNREGA) को लेकर चल रही बहस को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

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