रांची: झारखंड में खनन गतिविधियों का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ता दिख रहा है। राज्य की करीब 50 फीसदी पंचायतें खनन से प्रभावित मानी गई हैं। इन इलाकों में हवा, पानी और शोर प्रदूषण जैसी समस्याएं आम हैं। प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर देखा जा रहा है, जहां टीबी और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
टीबी के बढ़ते मामले चिंता का विषय
भारत सरकार की इंडिया टीबी रिपोर्ट 2024 के अनुसार झारखंड में कुल 63,137 लोग टीबी से पीड़ित हैं। इनमें 42 हजार से अधिक पुरुष और 20 हजार से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। इन मरीजों में से 32,993 लोग राज्य के अनुसूचित जिलों से हैं। सभी मरीजों का इलाज जारी है, लेकिन आंकड़े यह बताते हैं कि समस्या गंभीर बनी हुई है।

24 जिले खनन से प्रभावित
राज्य के सभी 24 जिले किसी न किसी रूप में खनन गतिविधियों से प्रभावित हैं। अलग-अलग पंचायतों में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, पत्थर, बालू और अन्य खनिजों का खनन होता है। इससे कई इलाकों में वायु और जल प्रदूषण बढ़ा है, जिसका सीधा असर लोगों के जीवन पर पड़ रहा है।
डीएमएफटी का उद्देश्य और हकीकत
खनन से होने वाली परेशानियों को कम करने के लिए सरकार ने डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) का प्रावधान किया है। नियम के अनुसार खनिजों पर लगने वाली रॉयल्टी का 30 फीसदी हिस्सा डीएमएफटी के रूप में वसूला जाता है। इस राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर किया जाना चाहिए।
ऑडिट में सामने आई गड़बड़ियां
राज्य गठन के बाद से अब तक 24 में से किसी भी जिले ने डीएमएफटी का पूरा लेखा-जोखा महालेखाकार कार्यालय को नहीं सौंपा। इससे यह पता नहीं चल पा रहा है कि डीएमएफटी की राशि का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं। महालेखाकार ने रांची, चतरा, बोकारो और लोहरदगा में नमूना जांच की, जिसमें प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के निर्देशों के उल्लंघन के मामले सामने आए। रिपोर्ट सदन में रखी गई, लेकिन नियम तोड़ने वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
गलत खर्च के आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि डीएमएफटी की राशि का कई जगह गलत उपयोग हुआ। अफसरों के लिए जिम बनाना, सरकारी दफ्तरों की रंगाई-पुताई जैसे कामों पर पैसे खर्च किए गए, जबकि यह राशि खनन प्रभावित लोगों के लिए थी।

आंकड़े जो हकीकत बताते हैं
झारखंड में कुल 4,345 पंचायतें हैं। इनमें से करीब 2,000 पंचायतों को खनन प्रभावित के रूप में चिन्हित किया गया है। यानी राज्य की लगभग आधी पंचायतें खनन के दुष्प्रभाव झेल रही हैं।




