Hazaribagh Land Scam : हजारीबाग वन भूमि घोटाले से जुड़े आरोपियों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। इस मामले में आरोपियों द्वारा दायर की गई Anticipatory Bail Petition को ACB कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
जिन लोगों की याचिका नामंजूर हुई है, उनमें राज कुमार प्रजापति, कुलशेखर प्रजापति, योगेश्वर प्रजापति, रामदेव प्रजापति, नेमीचंद प्रजापति, तिलक प्रजापति, ईश्वर दयाल गुप्ता और दविंद्र कुमार शामिल हैं।

किसकी शिकायत पर शुरू हुआ मामला
इस पूरे मामले में एसीबी के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस सुमित सौरभ लकड़ा ने शिकायत दर्ज कराई थी।
अपने बयान में उन्होंने बताया कि यह केस झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्रकार त्रिपुरारी सिंह द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर शुरू किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जमीन माफिया सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर उन्हें बेच रहे हैं।
तत्कालीन DC से जुड़ा है मामला
यह Land Scam हजारीबाग के तत्कालीन उपायुक्त विनय कुमार चौबे के कार्यकाल से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
जांच में सामने आया कि उनके कार्यकाल के दौरान बड़े पैमाने पर जमीन से जुड़े गड़बड़झाले हुए। इसी आधार पर इस केस में जांच आगे बढ़ी।

73 लोगों पर दर्ज हैं आरोप
Prevention of Corruption Act के केस नंबर 11/2025 के तहत कुल 73 लोगों पर आरोप लगाए गए हैं। इनमें से 68 लोगों के नाम FIR में दर्ज हैं।
यह संख्या इस बात को दिखाती है कि मामला कितना बड़ा और संगठित तरीके से किया गया था।
कैसे हुआ जमीन घोटाला
जमीन घोटाले का केस 25 सितंबर 2025 को दर्ज किया गया था। आरोप है कि कुछ जमीन माफियाओं ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी जमीन को अवैध रूप से खरीदा और बेचा।
इस जमीन में भूदान आंदोलन के तहत दान की गई भूमि, जंगल की जमीन, चारागाह भूमि और अन्य सरकारी व निजी जमीनें शामिल हैं। बाद में इन जमीनों को अपने नाम पर रजिस्टर्ड भी करा लिया गया।
छात्र नजरिया
एक छात्र के रूप में देखा जाए तो यह मामला प्रशासन और कानून व्यवस्था की गंभीर परीक्षा है।
अगर ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होती है, तो इससे भविष्य में जमीन घोटालों पर रोक लग सकती है। अब सभी की नजरें आगे की जांच और अदालत की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




