Political turmoil over the Election Commission : पश्चिम बंगाल में जारी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
इस मुद्दे पर विपक्षी दल एकजुट होते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, TMC और अन्य विपक्षी दल उनके समर्थन में खुलकर सामने आए हैं।

मामला अब सुप्रीम कोर्ट से लेकर संसद और सियासी बयानों तक पहुंच गया है।
TMC और विपक्ष का कांग्रेस से संपर्क
कांग्रेस नेता केसी Venugopal ने कहा कि इस पूरे मुद्दे पर टीएमसी लगातार कांग्रेस के संपर्क में है। उन्होंने बताया कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी ममता बनर्जी के समर्थन में खड़े हो गए हैं।
उनका कहना है कि ममता बनर्जी BJP के कथित गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठा रही हैं और ऐसे में सभी लोकतांत्रिक दलों को एकजुट होना चाहिए।
वोट अधिकार को लेकर चिंता

विपक्षी नेताओं का कहना है कि Vote का अधिकार छिनना नागरिकता पर सवाल खड़ा करने जैसा है।
वेणुगोपाल ने कहा कि अगर लोगों के नाम Voter List से हटाए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर लोकतंत्र को कमजोर करता है। इसी वजह से विपक्ष इस मुद्दे को गंभीर मान रहा है और ममता बनर्जी के साथ खड़ा है।
चुनाव आयोग पर पारदर्शिता का दबाव
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि चुनाव आयोग को पूरी पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP और चुनाव आयोग मिलकर बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट से नाम काट रहे हैं, जिससे लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है।
उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल में खासतौर पर उन लोगों के नाम हटाए गए हैं, जो परंपरागत रूप से ममता बनर्जी का समर्थन करते रहे हैं।
महाभियोग की मांग पर मंथन
इससे पहले विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने की मांग उठाई थी।
खबर है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल इस मांग के समर्थन में आ गए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर पूरा विपक्ष मिलकर आगे की रणनीति तय करेगा और सामूहिक फैसला लिया जाएगा।
ममता बनर्जी का सुप्रीम कोर्ट में आरोप
बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं और वहां चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि SIR के दबाव और तनाव के कारण कई बीएलओ की मौत हो चुकी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब असम में SIR नहीं हो रहा है, तो फिर बंगाल में ही यह प्रक्रिया क्यों लागू की जा रही है।
विपक्ष की एकजुटता का संकेत
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष एकजुट होता दिख रहा है।
आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है। अब सभी की नजरें कोर्ट और राजनीतिक दलों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।




