Uproar in Parliament over Books : बुधवार को संसद का माहौल काफी गरमाया रहा। बजट सत्र (Budget Session) के दौरान लोकसभा में किताबों को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि कार्यवाही बार-बार रोकनी पड़ी और अंत में सदन स्थगित करना पड़ा।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद की कार्यवाही को पूरी तरह प्रभावित कर दिया।

किताबों के हवाले से शुरू हुआ विवाद
लोकसभा में BJP सांसद Nishikant Dubey ने कांग्रेस और गांधी परिवार पर हमला बोलते हुए कुछ किताबों का जिक्र किया।
उन्होंने बिना किसी नेता का नाम लिए कहा कि कुछ ऐसी किताबों की चर्चा हो रही है, जो छपी तक नहीं हैं, लेकिन उनमें नेहरू परिवार, भ्रष्टाचार, लूट और अन्य गंभीर आरोपों का जिक्र है। उन्होंने सदन में कई किताबों के नाम भी गिनाए और नोटिस दिखाए।
विपक्ष का कड़ा विरोध
निशिकांत दुबे के बयान के बाद Congress सांसद भड़क गए। विपक्षी सदस्यों ने इसे आपत्तिजनक बताते हुए जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर से मांग की कि निशिकांत दुबे को निलंबित किया जाए।
प्रियंका गांधी ने भी बयान की आलोचना करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा, जबकि ऐसे बयान देने वालों को लगातार मौका मिल रहा है।

सदन में बढ़ता हंगामा
जैसे-जैसे बहस आगे बढ़ी, हंगामा और तेज होता गया। विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए आसन के पास पहुंच गए।
स्पीकर बार-बार सदन में शांति बनाए रखने की अपील करते रहे, लेकिन शोरगुल कम नहीं हुआ। आखिरकार स्थिति को संभालना मुश्किल हो गया।
कार्यवाही रोकने का फैसला
हंगामा बढ़ता देख स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही पहले कुछ समय के लिए स्थगित की, लेकिन हालात सामान्य नहीं हुए। इसके बाद मजबूरी में सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस कारण कई जरूरी मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।
संसद के बाहर भी बयानबाजी
सदन स्थगित होने के बाद संसद परिसर में भी माहौल शांत नहीं हुआ। राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया जा रहा है।
इसके जवाब में BJP सांसद Nishikant Dubey ने कहा कि उन्होंने जो बातें कहीं, वे किताबों में लिखी बातों पर आधारित हैं।
स्पीकर की बैठक भी बेनतीजा
हंगामे के बाद स्पीकर ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों को अपने कक्ष में चर्चा के लिए बुलाया।
विपक्ष ने शिकायत की कि अगर राहुल गांधी को किताबें कोट करने से रोका जा रहा है, तो निशिकांत दुबे को कैसे बोलने दिया गया। हालांकि इस बैठक के बाद भी विवाद पूरी तरह शांत नहीं हो सका।
किताबों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद संसद की कार्यवाही पर भारी पड़ा। दिनभर का सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया।
आम लोगों की नजर अब अगले सत्र पर टिकी है कि क्या संसद में शांति से कामकाज हो पाएगा या फिर राजनीतिक टकराव ऐसे ही जारी रहेगा।




