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सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की दलील, SIR को बताया वोट हटाने की प्रक्रिया

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Mamata Banerjee’s argument in the Supreme Court : नई दिल्ली में बुधवार को Supreme Court में पश्चिम बंगाल में लागू स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर अहम सुनवाई हुई।

इस सुनवाई में मुख्यमंत्री Mamata Banerjee खुद अदालत में मौजूद रहीं और उन्होंने अपनी बात मजबूती से रखी।

ममता बनर्जी ने साफ कहा कि SIR का मकसद वोट जोड़ना नहीं, बल्कि Vote डिलीट करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले केवल पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है।

खुद रखी अदालत में दलील

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने बताया कि उन्होंने Kolkata University के जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की है और वे एक योग्य वकील भी हैं।

राजनीति में आने से पहले उन्होंने कुछ समय तक वकालत की प्रैक्टिस भी की थी। इसी कारण उन्होंने खुद अदालत में अपनी बात रखने का फैसला किया।

SIR पर उठाए सवाल

ममता बनर्जी ने कोर्ट में कहा कि SIR के नाम पर लोगों के वोट काटे जा रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव में अभी दो साल का समय बचा है, तो फिर यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ दो महीने में क्यों पूरी की जा रही है। उनका कहना था कि इससे आम लोगों में डर का माहौल बन रहा है।

चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि आयोग का रवैया ठीक नहीं है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि “माफ कीजिए, लेकिन Election Commission अब निष्पक्ष नहीं दिख रहा है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है, जबकि असम और नॉर्थ ईस्ट के अन्य राज्यों में SIR नहीं कराया जा रहा।

दस्तावेज़ों की मांग पर आपत्ति

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि बंगाल में लोगों से आधार के साथ-साथ एक और सर्टिफिकेट मांगा जा रहा है, जबकि दूसरे राज्यों में ऐसा नहीं हो रहा।

उन्होंने कहा कि इससे आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है। कई लोग खेती के काम में लगे हैं और उन्हें अचानक नोटिस भेजे जा रहे हैं।

BLO पर दबाव का आरोप

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) पर काम का भारी दबाव है और इसी कारण कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं।

उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताया और कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।

कोर्ट की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की भावनात्मक दलीलें सुनीं और संकेत दिया कि यह मामला राज्य बनाम चुनाव आयोग का है।

कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ वकीलों के जरिए सभी दलीलें रिकॉर्ड पर लाई जाएंगी। अदालत ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

अगली सुनवाई कब

कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 9 फरवरी तय की है। तब तक सभी पक्षों से विस्तृत जवाब और दस्तावेज पेश करने को कहा गया है।

यह मामला अब सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरे देश में चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस छेड़ चुका है। आने वाली सुनवाई में यह साफ होगा कि SIR पर आगे क्या फैसला लिया जाता है।

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