50,000 People Living Without Roads: राज्य में सड़क, पुल-पुलिया और बुनियादी नागरिक सुविधाओं की कमी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) में स्वतः संज्ञान पर सुनवाई हुई।
यह मामला राजधानी रांची से जुड़ा है, जहां कई मोहल्लों में अब तक पक्की सड़क और नाली जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। Court में इस समस्या को गंभीर मानते हुए सुनवाई की गई।

किन इलाकों की उठी समस्या
मामले में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से बताया गया कि अरगोड़ा से न्यासराय रोड के पास स्थित छह प्रमुख मोहल्ले—राजेंद्र नगर, सिद्धि विनायक नगर, महुआ टोली, बेथलेहम नगर, धर्म कॉलोनी और लक्ष्मी नगर सहित अन्य आसपास के इलाकों में करीब 50 हजार लोग रहते हैं।
इन सभी क्षेत्रों में सड़क और नाली की सुविधा नहीं होने से लोगों को रोज परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बरसात में हालात और भी खराब
स्थानीय लोगों की शिकायत है कि यहां की अंदरूनी सड़कें कच्ची हैं और मुख्य सड़क तक जाने वाला रास्ता भी ठीक नहीं है।
बरसात के समय गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे वाहन फंस जाते हैं और पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। लोगों ने इन सड़कों की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है।

कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
इस मामले की सुनवाई High Court के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने की। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि इन सड़कों की मरम्मत और निर्माण की जिम्मेदारी किस विभाग की है।
सरकार की ओर से बताया गया कि इन सड़कों को बनाने की जिम्मेदारी ग्रामीण विकास विभाग और सड़क निर्माण विभाग की है।
दो हफ्ते का समय, अगली सुनवाई तय
राज्य सरकार ने इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। कोर्ट ने सरकार को जवाब देने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तारीख 26 फरवरी तय की है।
यह मामला दिखाता है कि बुनियादी सुविधाएं आम लोगों के जीवन में कितनी जरूरी हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है और लोगों को कब राहत मिलती है।




