High Court Strict on illegal Detention Case : झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर उस मामले की सुनवाई की, जिसमें एक 19 वर्षीय मैट्रिक छात्र (Matriculation Student) को कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप है।
यह सुनवाई दोपहर एक बजे हुई। Court के आदेश पर चतरा के SP Online अदालत के सामने उपस्थित हुए और मामले से जुड़ी जानकारी दी।

केस डायरी पर कोर्ट की नजर
सुनवाई के दौरान SP ने अदालत को केस डायरी पढ़कर सुनाई। इसमें 27 और 30 जनवरी को बच्चों से हुई पूछताछ का जिक्र किया गया।
Court ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए अगली सुनवाई की तारीख 13 फरवरी तय की। साथ ही, जांच अधिकारी (IO) को निर्देश दिया गया कि वे अगली तारीख पर पूरी केस डायरी पेश करें।
पुलिस अधिकारियों को सशरीर पेश होने का आदेश
सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने चतरा DSP , लावालौंग और टंडवा थाना प्रभारी को उनका मोबाइल फोन वापस कर दिया।
साथ ही आदेश दिया कि अगली सुनवाई में ये सभी अधिकारी खुद अदालत में सशरीर उपस्थित रहें।

हिरासत का पूरा मामला
दरअसल, लावालौंग थाना पुलिस ने 19 वर्षीय मैट्रिक छात्र को अवैध रूप से हिरासत में लिया था।
इसके अगले दिन उसे टंडवा पुलिस के हवाले कर दिया गया। इस मामले को लेकर छात्र की मां ने High Court में Habeas Corpus याचिका दायर की है।
कोर्ट के तीखे सवाल
पहली सुनवाई में कोर्ट ने चतरा DSP और दोनों थाना प्रभारियों को Court Room में बैठा लिया था और उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए थे।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि 26-27 जनवरी की रात दो बजे बच्चों को घर से क्यों उठाया गया। पूछताछ के बाद उन्हें तुरंत क्यों नहीं छोड़ा गया और 10 दिनों तक अवैध हिरासत में क्यों रखा गया।
केस डायरी में दर्ज विवरण पर सवाल
कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि टंडवा थाना में दर्ज कांड संख्या 26/2026 के मामले में जब पूछताछ के लिए बुलाया गया, तो केस डायरी में इसका क्या उल्लेख है।
DSP की ओर से बताया गया कि Station Diary में इसका जिक्र है। इसके बाद कोर्ट ने SP से फोन पर बात कर केस डायरी को लेकर सवाल पूछे।
दोनों पक्षों की दलील
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें रखीं, जबकि सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता ने पक्ष प्रस्तुत किया। अब कोर्ट इस मामले में अगली सुनवाई में और सख्ती से जवाब मांगने की तैयारी में है।




