Mohan Bhagwat’s Message: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मुंबई के वर्ली स्थित नेहरू सेंटर में विशेष व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख Mohan Bhagwat ने कहा कि भारतीय होना केवल नागरिकता नहीं, बल्कि एक स्वभाव और संस्कार है। यह जोड़ने वाला स्वभाव है, जिसे अनुशासन के साथ आगे बढ़ाना होगा।

भारतीयता का अर्थ और अनुशासन
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीयता किसी को अलग करने का विचार नहीं है, बल्कि सबको जोड़ने की भावना है।
उन्होंने जोर दिया कि समाज को मजबूत बनाने के लिए अनुशासन जरूरी है और इसी से राष्ट्र आगे बढ़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू संस्कृति के मूल भाव से जुड़े हैं और “हिंदू” कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक विशेषण है।
सेवा कार्य और स्वयंसेवकों की भूमिका
संघ प्रमुख ने बताया कि संघ के स्वयंसेवक सरकार (Volunteer Government) से किसी प्रकार का धन लिए बिना और समाज के सहयोग से अपने निजी संसाधनों से 1.3 लाख से अधिक सेवा गतिविधियां चला रहे हैं।

यह काम शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में हो रहा है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य सेवा है, न कि प्रसिद्धि।
राजनीति से दूरी, समाज से जुड़ाव
Mohan Bhagwat ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और न ही किसी संगठन से प्रतिस्पर्धा करता है।
संघ का न तो सत्ता में आने का लक्ष्य है और न ही लोकप्रियता या शक्ति की चाह। उन्होंने कहा कि संघ किसी के विरोध में काम नहीं करता, बल्कि जो अच्छे कार्य देश में हो रहे हैं, उन्हें सही ढंग से आगे बढ़ाने में सहयोग करता है।
शिक्षा और समाज सेवा का संदेश
उन्होंने Dr. Hedgewar का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी दो बातें नहीं छोड़ी जानी चाहिए—पहली, पढ़ाई में हमेशा प्रथम श्रेणी में आना और दूसरी, देशहित के कार्यों में सक्रिय भागीदारी। संघ का लक्ष्य पूरे समाज को संगठित करना है और इसी दिशा में वह लगातार काम कर रहा है।




