Embezzlement Cases Worth Crores : रांची से जुड़े एक पुराने वित्तीय अनियमितता के मामले में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।
यह मामला झारखंड राज्य आदिवासी Co-operative Vegetable Marketing Federation Limited से जुड़ा है, जहां पद के दुरुपयोग और सरकारी धन के गबन के आरोप सामने आए हैं।

इस पूरे मामले की जांच कई सालों से चल रही है और अब जांच एजेंसी ने इसे अगले चरण में पहुंचा दिया है।
कब और कैसे शुरू हुआ मामला
यह मामला साल 2021 से जांच के दायरे में है। लोकायुक्त की अनुशंसा पर तत्कालीन DG ACB के आदेश से 19 फरवरी 2021 को प्रारंभिक जांच दर्ज की गई थी।
जांच के दौरान संस्था में हुई वित्तीय गड़बड़ियों की पड़ताल के लिए एक उच्च स्तरीय टीम बनाई गई, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।
गबन की अवधि और आरोप
जांच में सामने आया कि यह कथित गबन 1 अप्रैल 2017 से 5 जुलाई 2018 के बीच हुआ।

उस समय के प्रबंध निदेशक पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए नियमों को नजरअंदाज किया और सरकारी राशि का दुरुपयोग किया। आरोपों के अनुसार, करोड़ों रुपये के लेनदेन में गंभीर अनियमितताएं हुईं।
पुराने मामले से जुड़ा नया मोड़
जांच के दौरान एक और अहम बात सामने आई। रांची के नगड़ी क्षेत्र में वर्ष 2013 की एक आवासीय योजना में गड़बड़ी को लेकर जिस ठेकेदार पर पहले से प्राथमिकी दर्ज थी, उसी ठेकेदार को दोबारा काम सौंप दिया गया।
इसे भी जांच में बड़ी लापरवाही और नियमों का उल्लंघन माना गया है।
FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू
पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद जांच एजेंसी ने 2 जनवरी 2026 को लोकायुक्त को पत्र लिखकर संबंधित पूर्व अधिकारी के खिलाफ नियमित प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मांगी है।
साथ ही, जांच रिपोर्ट की एक प्रति मंत्रिमंडल सचिवालय और नगर विकास व आवास विभाग (Housing Department) को भी भेजी गई है, ताकि विभागीय स्तर पर भी पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके।
आगे क्या होगा
फिलहाल मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अनुमति मिलते ही FIR दर्ज की जाएगी और आगे की कार्रवाई शुरू होगी। इस प्रकरण ने एक बार फिर सरकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।




