Bengal case reaches Supreme Court: चुनाव से जुड़े एक अहम मामले में चुनाव आयोग (Election Commission) ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र दाखिल किया है।
इसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया गया है।

आयोग का कहना है कि इन बयानों की वजह से राज्य में डर का माहौल बना, जिससे SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के काम में लगे कई कर्मचारियों ने खुद को इस काम से मुक्त करने के लिए आवेदन दे दिए।
SIR के दौरान कर्मचारियों की परेशानी
शपथ पत्र में बताया गया है कि देश के कई राज्यों में SIR की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन पश्चिम बंगाल ऐसा एकमात्र राज्य है जहां कर्मचारियों को इस स्तर की दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
आयोग के अनुसार, काम कर रहे कर्मचारियों को धमकियां भी मिलीं, लेकिन इन मामलों में राज्य सरकार की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने में ढिलाई बरती गई।
सुरक्षा कारणों से CEO को Y+ सुरक्षा
स्थिति की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के CEO को Y+ सुरक्षा देने का फैसला किया।

आयोग ने यह भी बताया कि किसी अन्य राज्य में ऐसी सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत नहीं पड़ी। इसके अलावा, शपथ पत्र में बंगाल सरकार के एक मंत्री के उस बयान का भी जिक्र है, जिसमें आयोग की टांग तोड़ने जैसी बात कही गई थी।
शपथ पत्र में दर्ज गंभीर घटनाएं
आयोग ने 24 नवंबर 2025 को CEO कार्यालय के घेराव का उल्लेख किया है।
इस दौरान जबरन कार्यालय में घुसने, तोड़फोड़ करने और ताले बंद करने जैसी घटनाएं सामने आईं। साथ ही बताया गया कि बंगाल की मतदाता सूची से करीब 58 लाख वोटर या तो दूसरी जगह चले गए हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है।
वोटरों की जांच और नोटिस
वोटरों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए आयोग की ओर से 1.51 करोड़ Notice जारी किए गए हैं। शपथ पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि 14 जनवरी 2026 को ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए भ्रम फैलाने की कोशिश की।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
उल्लेखनीय है कि सत्तारूढ़ दल के एक सांसद ने Supreme Court में याचिका दाखिल कर राज्य पुलिस को चुनाव आयोग के नियंत्रण में देने की मांग की है। इस मामले पर आगे सुनवाई होने की संभावना है।




