Ranchi : रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के खिलाफ कथित बयानबाजी से जुड़े मामले में दायर याचिका पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। यह याचिका बाबूलाल मरांडी की ओर से दायर की गई है, जिसमें रामगढ़, सिमडेगा, बरहेट और मधुपुर थाने में दर्ज प्राथमिकियों को रद्द करने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सभी पहलुओं पर सुनवाई की।
अलग-अलग थानों में दर्ज हुए थे केस
मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, 25 अगस्त 2023 को सिमडेगा थाना में कांड संख्या 104/2023 दर्ज की गई थी। इसी तरह बरहेट थाना में भी कांड संख्या 104/2023 दर्ज हुई थी। इसके अलावा रामगढ़ थाना में कांड संख्या 196/2023 और देवघर जिले के मधुपुर थाना में कांड संख्या 176/2023 दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता ने इन सभी मामलों को रद्द करने का आग्रह किया है।

हाईकोर्ट ने हटाई पीड़क कार्रवाई पर रोक
इस मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने चारों मामलों में बाबूलाल मरांडी के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर लगी रोक को हटा दिया है। इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से एक सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था।
यूट्यूब चैनल से जुड़ा है विवाद
दरअसल, आरोप है कि एक निजी यूट्यूब चैनल पर झारखंड में बाबूलाल मरांडी की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के खिलाफ दिए गए साक्षात्कार को अपलोड किया गया था। इस साक्षात्कार को लेकर झामुमो के कार्यकर्ताओं ने राज्य के छह जिलों के अलग-अलग थानों में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
अदालत में दोनों पक्षों की दलील
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि एक ही मामले को लेकर अलग-अलग थानों में प्राथमिकी दर्ज करना गलत है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से दर्ज मामलों को उचित ठहराया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं।
आगे के आदेश का इंतजार
अब इस मामले में हाईकोर्ट के अगले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा अहम मुद्दा माना जा रहा है। आगे की सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि इन मामलों का भविष्य क्या होगा।





