Citizenship and Voter List Case : कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Sonia Gandhi ने नागरिकता हासिल करने से पहले मतदाता सूची (Voter List) में नाम जुड़े होने के मामले में अदालत में अपना जवाब दाखिल किया है।
उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका गलत और अनुमान पर आधारित है। उनका आरोप है कि यह याचिका राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया है।

अदालत में हुई सुनवाई, अगली तारीख तय
यह मामला विशेष न्यायाधीश (CBI) CBI विशाल गोगने की अदालत में सुना गया।
सोनिया गांधी की ओर से उनके वकील ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पुनर्विचार याचिका को खारिज करने की मांग की। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 21 फरवरी तय की है।
दस्तावेज़ों पर सवाल, आरोपों से इनकार
सोनिया गांधी ने अपने जवाब में कहा कि शिकायतकर्ता ने प्रमाणिक रिकॉर्ड के बजाय अनुमान, Media Report और निजी धारणाओं के आधार पर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दस्तावेज़ को जाली या गलत साबित नहीं किया गया है, इसलिए आरोप टिकाऊ नहीं हैं।

वोटर लिस्ट और जिम्मेदारी किसकी?
जवाब में यह भी कहा गया कि नागरिकता से जुड़े मामले केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि मतदाता सूची तैयार करने और उसे अद्यतन रखने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होती है।
इस तरह के मामलों में आपराधिक अदालतों द्वारा किसी व्यक्ति की निजी शिकायत पर दखल देना चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जाना चाहिए।
पुराने तथ्यों का उल्लेख
दस्तावेज़ों के अनुसार, सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में जोड़ा गया था, जबकि अप्रैल 1983 में उन्होंने भारतीय नागरिकता प्राप्त की।
वहीं, BJP IT सेल प्रमुख अमित मालवीय ने पहले आरोप लगाया था कि उनका नाम नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में शामिल हुआ।
मामला कैसे आगे बढ़ा
यह मामला तब आगे बढ़ा जब 11 सितंबर 2025 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACMM) वैभव चौरसिया ने सोनिया गांधी के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने Session Court में पुनर्विचार याचिका दायर की, जिस पर 9 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने नोटिस जारी किया था।




