झारखंड में यहां कोरोना का पहला टीका लेने के बाद 50 से अ‎धिक महिलाएं पाई गई गर्भवती, दूसरा टीका लेने के लिए अब करना पड़ेगा 9 महीने तक इंतजार

धनबाद: कोरोना वैक्सीन से उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। अन्य महिलाओं की तुलना में गर्भवती महिलाओं में कोरोना वायरस का गंभीर खतरा नहीं हैं।

यह दावा एक रिसर्च में किया गया है। यह रिसर्च 1 मार्च से 14 अप्रैल तक इंग्लैंड के NHS अस्पताल में भर्ती 427 गर्भवती महिलाओं पर किया गया। ये सभी गर्भवती महिलाएं कोरोना पॉजिटिव थीं।

शोधकर्ताओं का कहना था कि इन 10 में से सिर्फ एक महिला को आईसीयू की जरूरत महसूस हुई। लेकिन अब झारखंड के धनबाद में 50 से अ‎धिक महिलाएं और महिला फ्रंट लाइन वर्कर ने कोरोना वैक्सीन का पहला डोज़ लिया था, यह पहला डोज़ लेने के बाद पता चला की वे महिलाएं तो गर्भवती थीं।

झारखंड में यहां कोरोना का पहला टीका लेने के बाद 50 से अ‎धिक महिलाएं हो गई गर्भवती

यह आंकड़ा पहली बार दर्ज किया गया है। ऐसे में दूसरे डोज लेने को लेकर सवाल खड़ा हो गया, क्योंकि टीकाकरण गाइडलाइन के अनुसार गर्भवती महिलाओं को टीका नहीं दिया जा सकता। गर्भवती होने वालों में सबसे ज्यादा सहियाएं हैं।

इसके साथ ही आंगनबाड़ी महिला कर्मी और स्वास्थ्य  विभाग के महिला कर्मी शामिल हैं। कुछ महिला पुलिसकर्मी भी हैं।दूसरे डोज के लिए इन महिलाओं ने स्वास्थ्य विभाग से संपर्क किया था।

मामला सामने आने के बाद जिला टीकाकरण पदाधिकारी बताते हैं कि गाइडलाइन के तहत गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन नहीं देना है। हालांकि अब तक दूध पिलाने वाली महिलाओं को भी टीका लगाने की अनुमति नहीं है।

अब करना पड़ेगा 9 महीने तक इंतजार 

हालांकि अब तक दूध पिलाने वाली महिलाओं को भी टीका लगाने की अनुमति नहीं है। जिले में कोरोना वायरस टीका सबसे पहले फ्रंट लाइन में काम करने वाले कर्मियों को लगाया गया है।

अब तक धनबाद में 40 हजार से ज्यादा फ्रंट लाइन कर्मियों को टीका लगाया गया है। सबसे ज्यादा टीका जनवरी और फरवरी माह में इन कर्मियों को लगाया गया है। इसके बाद आम लोगों के लिए टीकाकरण शुरू हुआ था।

झारखंड में यहां कोरोना का पहला टीका लेने के बाद 50 से अ‎धिक महिलाएं हो गई गर्भवती

बता दें कि कई रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया था कि गर्भवती महिलाओं का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और इसकी वजह से इनमें दूसरी महिलाओं की तुलना में संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी के अनुसार आम महिलाओं की तुलना में अश्वेत गर्भवती महिलाओं में कोरोना का खतरा चार गुना ज्यादा होता है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखने की जरूरत है।

गर्भावस्था के दौरान लगातार हार्मोन में बदलाव होते रहते हैं। कई प्रकार के कॉम्प्लिकेशन होते हैं।

जिसमें शुगर का बढ़ना, थायराइड का बढ़ना सहित अन्य हार्मोन परिवर्तन होते हैं। ऐसे में कोरोना वायरस से बचाव जरूरी है।

झारखंड में यहां कोरोना का पहला टीका लेने के बाद 50 से अ‎धिक महिलाएं हो गई गर्भवती

गर्भवती महिला ने समय से पहले बच्चे को जन्म दिया

एक स्टडी में गर्भवती महिलाओं में मोटापे, पहले से कोई बीमारी और 35 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में संक्रमण फैलने की संभावना के बारे में भी बताया गया है।

शोध में यह भी पाया गया कि कोरोना वायरस से संक्रमित चार में से एक गर्भवती महिला ने समय से पहले बच्चे को जन्म दिया।

इससे पहले कई रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया था कि गर्भवती महिलाओं का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है और इसकी वजह से इनमें दूसरी महिलाओं की तुलना में संक्रमण फैलने का खतरा ज्यादा होता है।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी के अनुसार आम महिलाओं की तुलना में अश्वेत गर्भवती महिलाओं में कोरोना का खतरा चार गुना ज्यादा होता है।

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