Major action by Income Tax Department : रांची में चावल कारोबार से जुड़ी Tax चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा ने आधुनिक डिजिटल और Forensic Accounting तकनीकों की मदद से इस चोरी की परतें खोली हैं।
जांच के दौरान यह पता चला कि कई चावल व्यापारी अपने असली कारोबार को खातों में नहीं दिखा रहे थे और “बुक्स ऑफ अकाउंट” से बाहर लेन-देन कर रहे थे।

फॉरेंसिक तकनीक बनी जांच का आधार
आयकर विभाग ने इस मामले में Digital Forensic Accounting, Forensic Audit और अन्य तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया।
इन तरीकों से व्यापार से जुड़े ऐसे सबूत मिले, जो पहले छिपाए गए थे। इससे यह साफ हुआ कि व्यापारी जानबूझकर सही जानकारी छुपा रहे थे।
डिजिटल डिवाइस की गहन जांच
अनुसंधान शाखा ने बाबा ग्रुप और उनसे जुड़े ठिकानों पर जांच के दौरान Computers, laptops and mobiles जैसे डिजिटल डिवाइस खंगाले। इसके लिए डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली गई।
जांच में इन डिवाइसों से खरीद-बिक्री, नकद लेन-देन और कच्चे व्यापार का पूरा ब्योरा सामने आया।

मोबाइल डेटा से मिले अहम सुराग
जांच के दौरान व्यापारियों के मोबाइल फोन से डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर किया गया। इसमें नकद लेन-देन से जुड़े आपसी मैसेज मिले, जो खातों में दर्ज नहीं थे।
कुछ मोबाइल में ऐसे संदेश भी पाए गए, जिनमें कच्चे व्यापार से मिली नकदी को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए हवाला कारोबारियों की मदद लेने की बात लिखी थी।
आगे भी जारी रहेगी जांच
Digital Device से मिले डेटा के आधार पर आयकर अधिकारियों की टीम आगे की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।
छात्रों की नजर से सीख
एक छात्र के तौर पर देखें तो यह मामला बताता है कि तकनीक के दौर में गलत तरीके से कमाई छुपाना आसान नहीं है। डिजिटल सबूत आखिरकार सच्चाई सामने ले ही आते हैं।




