Hazaribagh Forest Land Scam: झारखंड के चर्चित हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में एक अहम मोड़ आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने निलंबित IAS अधिकारी विनय चौबे के खिलाफ विशेष अदालत में Charge Sheet दाखिल कर दी है।
यह कार्रवाई शुक्रवार को की गई। इस मामले को लेकर राज्य में पहले से ही काफी चर्चा और गंभीरता बनी हुई है।

वन कानून की अनदेखी का आरोप
वन संरक्षण अधिनियम के अनुसार, केंद्र सरकार की अनुमति के बिना वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता।
आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और खरीदार विनय सिंह ने आपसी मिलीभगत से नियमों को नजरअंदाज किया और साजिश के तहत जमीन के मालिकाना हक में गलत तरीके से बदलाव किया गया।
2013 में हुआ था मामला उजागर
इस घोटाले का खुलासा वर्ष 2013 में हुआ था। मामले के सामने आने के बाद अवैध जमाबंदियों को रद्द कर दिया गया था, जिसे राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भी सही माना था।
ACB ने प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद सरकार से अनुमति ली और 25 सितंबर 2025 को हजारीबाग थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

पहले से जेल में बंद हैं अधिकारी
यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई है जब विनय चौबे पहले से ही भ्रष्टाचार के अन्य गंभीर आरोपों में जेल में बंद हैं। एसीबी ने उन्हें 11 जनवरी 2026 को इस वन भूमि घोटाले के सिलसिले में रिमांड पर लिया था।
अन्य आरोपियों पर भी कार्रवाई
लंबी पूछताछ और सबूतों के आधार पर चार्जशीट तैयार की गई है। इस मामले में उनके करीबी और Nexgen Automobile के संचालक विनय सिंह को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला उस समय का है जब विनय चौबे हजारीबाग में डीसी के पद पर तैनात थे।
आरोप है कि उनके कार्यकाल में वन विभाग की भूमि के पांच प्लॉट्स की अवैध रूप से जमाबंदी कराई गई। यह जमीन गैरमजरुआ खास जंगल झाड़ी के रूप में दर्ज थी।




