High Court Strict on Encounter: Allahabad High Court ने उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर की बढ़ती घटनाओं पर सख्त रुख अपनाया है।
Court ने साफ कहा है कि पुलिस कानून से ऊपर नहीं है और अपराधियों को सजा देना अदालत का काम है, न कि PolicE का।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित SP और SSP सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
सुनवाई में कोर्ट की अहम टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने DGP और गृह सचिव से सवाल किया कि क्या सरकार ने पुलिस को आरोपियों के पैरों में गोली मारने या Encounter का दावा करने के लिए कोई मौखिक या लिखित आदेश दिए हैं।
कोर्ट ने यह टिप्पणी उस समय की, जब वह मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार समेत तीन आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। ये आरोपी अलग-अलग मुठभेड़ों में पुलिस की गोली से घायल हुए थे।
मुठभेड़ों पर उठे सवाल
कोर्ट ने संज्ञान लिया कि इन मुठभेड़ों में कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ था।

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इन मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन घायलों ने न तो मजिस्ट्रेट के सामने और न ही किसी डॉक्टर के समक्ष बयान दर्ज कराया।
Supreme Court के निर्देशों की याद
हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हैं।
अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि प्रमोशन या सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए गोली चलाने की प्रवृत्ति गलत और खतरनाक है, और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस के लिए नई गाइडलाइन
अदालत ने पुलिस के लिए 6 बिंदुओं की गाइडलाइन जारी की है और इनके पालन को अनिवार्य कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इन निर्देशों का उद्देश्य कानून का सम्मान बनाए रखना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।




