रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने दामोदर नाथ शाहदेव की ओर से दायर हैबियस कॉर्पस याचिका पर राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद मामले का निपटारा कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में कांके थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यह जानकारी महाधिवक्ता राजीव रंजन ने हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ को दी।
गिरफ्तारी के बाद कोर्ट की टिप्पणी
याचिकाकर्ता के पुत्र देवव्रत नाथ शाहदेव को एक अन्य मामले में खूंटी थाना कांड संख्या 03/2026 में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इसके बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अब इस याचिका पर आगे सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है।

पुलिस कार्यशैली पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट के आदेश के आलोक में रांची ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर अदालत में उपस्थित हुए। पहली ही पाली में कोर्ट ने मौखिक रूप से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कोर्ट ने साफ कहा कि पुलिस को कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई करनी चाहिए, न कि बिना किसी ठोस आधार के रात में किसी को उठा लिया जाए।
कारण बताओ नोटिस पर जवाब नहीं
मामले में हाईकोर्ट ने 14 जनवरी को कांके थाना प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद रांची एसएसपी द्वारा नोटिस जारी कर पूछा गया था कि क्या कार्रवाई की गई है। लेकिन इस संबंध में कोर्ट को कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिस पर अदालत ने नाराजगी जताई।
दूसरी पाली में एसएसपी तलब
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए दूसरी पाली में दोपहर 2:30 बजे रांची एसएसपी को तलब किया। तय समय पर रांची ग्रामीण एसपी कोर्ट में मौजूद हुए और बताया गया कि रांची एसएसपी अवकाश पर हैं।
शपथ पत्र की मांग
दरअसल, 14 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कांके थाना प्रभारी को जारी शो-कॉज नोटिस पर की गई कार्रवाई की जानकारी शपथ पत्र के रूप में देने का निर्देश दिया था। लेकिन आज की सुनवाई में यह शपथ पत्र कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया गया।

छात्र नजरिया
इस पूरे मामले से यह साफ होता है कि न्यायालय पुलिस की मनमानी पर सख्त रुख अपनाए हुए है। कानून सभी के लिए बराबर है और पुलिस को भी नियमों का पालन करना जरूरी है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है, ताकि आम लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।




