Jharkhand High Court : झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद (Marital Dispute) से जुड़े एक अहम मामले में सख्त और साफ फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने कहा कि पत्नी की निजी और आपत्तिजनक तस्वीरों को उसकी अनुमति के बिना रखना और उन्हें सार्वजनिक करने की धमकी देना मानसिक क्रूरता (Mental Toughness) है।

अदालत ने इसे महिला के चरित्र को बदनाम करने का गंभीर प्रयास माना और कहा कि इस तरह का व्यवहार वैवाहिक रिश्ते की नींव को कमजोर करता है।
शादी के तुरंत बाद शुरू हुआ विवाद
यह मामला धनबाद जिले के झरिया इलाके से जुड़ा है। साल 2020 में एक युवक और युवती की शादी हुई थी। पत्नी के अनुसार, शादी के अगले ही दिन जब वह सो रही थी, तब पति ने बिना बताए उसका मोबाइल फोन चेक किया।
मोबाइल के Digital Account में उसकी कुछ पुरानी निजी तस्वीरें थीं। आरोप है कि पति ने चुपके से वे तस्वीरें अपने फोन में ट्रांसफर कर लीं।
धमकी देकर किया गया मानसिक शोषण
पत्नी का कहना है कि इसके बाद पति ने उन्हीं तस्वीरों के जरिए उसे मानसिक रूप से परेशान करना शुरू कर दिया। उसने न केवल उन तस्वीरों को अपने परिजनों को दिखाया, बल्कि Social Media पर डालने की धमकी भी दी।
इस डर और अपमान की वजह से पत्नी को लगातार मानसिक तनाव झेलना पड़ा और उसका आत्मसम्मान बुरी तरह प्रभावित हुआ।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला पलटा
मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने की।
कोर्ट ने कहा कि किसी के निजी जीवन की तस्वीरों तक बिना अनुमति पहुंच बनाना और उनका इस्तेमाल डराने या दबाव बनाने के लिए करना मानसिक क्रूरता है।
पति द्वारा पत्नी की छवि को परिवार के सामने खराब करना असहनीय मानसिक पीड़ा देता है।
इससे पहले फैमिली कोर्ट ने पत्नी की तलाक की अर्जी खारिज कर दी थी। लेकिन हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया।
अदालत ने साफ किया कि हिंदू विवाह अधिनियम (Hindu Marriage Act) के तहत क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा नहीं होती, बल्कि किसी की प्रतिष्ठा और सम्मान को ठेस पहुंचाना भी मानसिक क्रूरता का मजबूत आधार है।
कोर्ट ने पत्नी के पक्ष में फैसला देते हुए इसे तलाक के लिए वैध कारण माना।




