India-US Interim Trade Agreement: भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते (ITA) का फ्रेमवर्क जारी किया। इस समझौते के तहत भारतीय सामानों पर अमेरिका का टैक्स 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है।
इसके साथ ही रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त Tax भी हटा लिया गया है। सरकार का कहना है कि यह फैसला व्यापार को आसान बनाने और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम है।

टैरिफ में बड़ी कटौती
समझौते के अनुसार अब भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में कम शुल्क देना होगा। इससे कपड़ा, चमड़ा, Handicraft, Plastic और अन्य क्षेत्रों के निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार का दावा है कि कम टैरिफ से भारतीय सामानों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और बाजार तक पहुंच आसान होगी।
रूस से तेल पर सख्त संकेत
हालांकि, समझौते से जुड़ी कुछ बातों पर सवाल भी उठे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि जो जानकारी सामने आई है, उससे साफ संकेत मिलता है कि भारत अब रूस से तेल आयात नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस से तेल खरीदता है, तो 25 प्रतिशत का दंड दोबारा लगाया जा सकता है।

आयात शुल्क और किसानों की चिंता
जयराम रमेश के अनुसार इस डील में भारतीय किसानों के लिए चिंता की बात है।
उनका कहना है कि अमेरिकी किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए भारत आयात शुल्क में बड़ी कटौती करेगा। इससे अमेरिका से भारत का वार्षिक आयात तीन गुना तक बढ़ सकता है, जिसका असर घरेलू किसानों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस का तंज
कांग्रेस ने इस डील को लेकर सरकार पर तंज कसा है। पार्टी का कहना है कि इतनी बैठकों और फोटो-ऑप्स के बाद भी ठोस फायदे स्पष्ट नहीं हैं।
जयराम रमेश ने कहा कि “नमस्ते ट्रंप” और “हाउडी मोदी” जैसे कार्यक्रमों के बावजूद नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखते। उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोस्ती की बातें हुईं, लेकिन असली लाभ सामने नहीं आया।
अब आगे क्या?
कांग्रेस ने मांग की है कि सरकार समझौते के सभी बिंदुओं को साफ-साफ जनता के सामने रखे।
खासकर IT और सेवा क्षेत्र के निर्यात को लेकर बनी अनिश्चितता पर जवाब दे। आने वाले दिनों में यह Deal राजनीति और अर्थव्यवस्था—दोनों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बनी रहेगी।




