पारा शिक्षकों को वेतनमान नहीं देगी सरकार, प्रस्तावित नियमावली को पारा शिक्षकों ने बताया आपत्तिजनक

प्रस्ताव ने वेतनमान के सपने को ही चकनाचूर कर दिया

रांची : एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा (राज्य इकाई) और झारखंड राज्य प्रशिक्षित पारा शिक्षक संघ (राज्य इकाई) की शनिवार को शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के साथ बैठक हुई।

प्रोजेक्ट भवन स्थित स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के कार्यालय में शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभागीय सचिव राजेश शर्मा, राज्य परियोजना निदेशक किरण कुमारी पाशी, प्रसाशी पदाधिकारी जयंत मिश्रा भी मौजूद थे।

एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा (राज्य इकाई) के सदस्य प्रद्युम्न कुमार सिंह (सिंटू) ने बताया कि इस बैठक में सरकार की ओर से झारखंड पारा शिक्षक सेवा शर्त नियमावली 2021 का प्रारूप प्रस्तुत किया गया। सिंह ने कहा कि यह नियमावली (प्रारूप) आपत्तिजनक है।

उन्होंने बताया कि सरकार पारा शिक्षकों को वेतनमान देने के अपने वादे से पीछे हट गयी है। इस नियमावली में टेट पास पारा शिक्षकों को 50 प्रतिशत और प्रशिक्षित पारा शिक्षकों को 30 प्रतिशत मानदेय वृद्धि का लाभ देने का प्रस्ताव रखा गया है।

सिंह ने बताया कि वार्ता के दौरान एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के शिष्टमंडल ने टेट पास पारा शिक्षकों को तत्काल वेतनमान देने और प्रशिक्षित पारा शिक्षकों के मानदेय में तत्काल न्यूनतम 40 प्रतिशत वृद्धि करने और आकलन परीक्षा पास पारा शिक्षकों को वेतनमान देने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा।

पारा शिक्षकों को वेतनमान नहीं देगी सरकार, प्रस्तावित नियमावली को पारा शिक्षकों ने बताया आपत्तिजनक

सिंह ने बताया कि प्रस्तावित नियमावली में कई प्रस्ताव गायब हैं और सरकार की चाल वेतनमान के संघर्ष को मानदेय वृद्धि पर रोकने की है।

इस प्रस्ताव ने वेतनमान के सपने को ही चकनाचूर कर दिया है। यानी, सिर्फ पढ़ाओ, मानदेय लो, रिटायर करो और घर जाओ।

उन्होंने बताया कि 12 दिसंबर (रविवार) को एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा की सभी जिला इकाइयों की बैठक होगी।

इस बैठक में सभी जिलाध्यक्ष, जिला सचिव सरकार द्वारा प्रस्तावित नियमावली की प्रति पर व्यापक चर्चा कराते हुए राज्य इकाई को अवगत कराने पर विचार किया जायेगा।

वार्ता में गिरिडीह विधायक, शिक्षा सचिव, राज्य परियोजना निदेशक एवं मोर्चा के प्रतिनिधि के रूप में बिनोद बिहारी महतो, संजय कुमार दुबे, ऋषिकेश पाठक, प्रमोद कुमार, दशरथ ठाकुर और मोहन मंडल शामिल थे।

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