रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड सहित अन्य कंपनियों द्वारा दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि उसके आदेशों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
सुनवाई में उठे अहम सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि जब संबंधित विभाग के सचिव देश से बाहर थे, तो उनके नाम से शपथ पत्र कैसे दाखिल किया गया। साथ ही यह भी पूछा गया कि उप सचिव ने किस अधिकार के तहत सचिव के प्रतिनिधि के रूप में आवेदन प्रस्तुत किया। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि इन सभी सवालों का संतोषजनक जवाब संबंधित अधिकारी अगली सुनवाई में दें।

व्यक्तिगत उपस्थिति पर नाराजगी
कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि पूर्व आदेश के बावजूद खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए। सचिव की ओर से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन दिया गया था, जिसमें बताया गया कि वे मुख्यमंत्री के साथ विदेश यात्रा पर हैं। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि जब पहले से कोर्ट के आदेश की जानकारी थी, तो विदेश जाने से पहले छूट क्यों नहीं मांगी गई।
सरकार की दलील और कोर्ट की टिप्पणी
राज्य सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि राशि के भुगतान से जुड़ी फाइल विभागीय स्तर पर स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के कारण कैबिनेट की बैठक नहीं हो सकी। इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आज का समय इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का है और यदि सरकार गंभीर होती तो वर्चुअल माध्यम से भी कैबिनेट की मंजूरी ली जा सकती थी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस तरह का बहाना स्वीकार्य नहीं है।
न्यायालय का सख्त संदेश
हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने दो टूक कहा कि कोर्ट के आदेशों के पालन में लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने 4 मार्च 2025 के आदेश के अनुपालन के लिए समय बढ़ाने की मांग की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 दिसंबर 2025 को पहले ही पुष्टि मिल चुकी है।
अगली सुनवाई की तारीख
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 27 जनवरी की तिथि निर्धारित की है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारी कोर्ट के सवालों का क्या जवाब देते हैं।





