Ranchi: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में अब बड़ा बदलाव लाया जा रहा हैं। आपको बता दे कि झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में शिकायतों के समाधान के लिए एक व्यवस्थित तंत्र तैयार किया जा रहा है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने शिकायत निवारण प्रणाली का प्रारूप तैयार करते हुए सभी विश्वविद्यालयों को भेज दिया है।
इस प्रस्ताव के अनुसार विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर अलग-अलग शिकायत निवारण समितियों का गठन किया जाएगा। फिर संबंधित विश्वविद्यालय इस प्रारूप को अपने सिंडिकेट से मंजूरी दिलाकर विभाग को भेजेंगे, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा।

बताते चले कि कॉलेज स्तर पर गठित समिति की अध्यक्षता प्राचार्य या प्रोफेसर-इन-चार्ज करेंगे। कुलपति द्वारा नामित एक विभागाध्यक्ष तथा प्राचार्य द्वारा नामित दो वरिष्ठ शिक्षक सदस्य होंगे। एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे और एक छात्र प्रतिनिधि को भी आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा विश्वविद्यालय स्तर की शिकायत निवारण समिति की अध्यक्षता डायरेक्टर स्टूडेंट अफेयर्स करेंगे। समिति में प्रॉक्टर, कुलपति द्वारा नामित पाँच प्रोफेसर, अंतिम वर्ष के दो छात्र सदस्य शामिल होंगे तथा रजिस्ट्रार सदस्य सचिव होंगे। आवश्यकता पड़ने पर अध्यक्ष अन्य सदस्यों को भी नामित कर सकेंगे।
इस नई व्यवस्था के अनुसार छात्र शैक्षणिक सुविधाओं की कमी, प्रॉस्पेक्टस में उल्लिखित सुविधाएँ उपलब्ध न होने, भेदभाव या उत्पीड़न, नामांकन संबंधी गड़बड़ी, छात्र संघ चुनाव से जुड़े विवाद, नियमों के उल्लंघन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा न मिलने जैसी तमाम शिकायतें दर्ज करा सकेंगे।
इसके अलावा समिति में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग से कम से कम एक सदस्य का होना अनिवार्य होगा तथा सभी सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष का निर्धारित किया गया है।इस पहल से छात्रों और शिक्षकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सीधे और प्रभावी मंच मिलने की उम्मीद है।





