Piyush Pandey becomes DGP : कानपुर (महाराजपुर) से जुड़ी एक गर्व की खबर सामने आई है। नर्वल तहसील के करबिगवां गांव के रहने वाले आईपीएस अधिकारी पीयूष पांडेय को शनिवार को पश्चिम बंगाल का कार्यवाहक DGP नियुक्त किया गया है।
जैसे ही यह सूचना कानपुर के चकेरी में रह रहे उनके चचेरे भाई आशुतोष पांडेय को मिली, परिवार के साथ-साथ गांव में भी खुशी की लहर दौड़ गई। करबिगवां के लोग इस उपलब्धि पर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

गांव से लेकर शहर तक खुशी का माहौल
Piyush Pandey की इस नियुक्ति की खबर मिलते ही करबिगवां में लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर खुशी जाहिर की।
गांव के लोगों का कहना है कि पीयूष ने अपनी मेहनत से न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन किया है।
BJP नेता जितेंद्र प्रताप सिंह ने भी इसे गांव के लिए ऐतिहासिक पल बताया और लोगों के बीच मिठाइयां बांटीं।
शिक्षा और सेवा का मजबूत सफर
पीयूष पांडेय 1993 बैच के IPS अधिकारी हैं और उन्हें पश्चिम Bengal Cadre मिला था। उन्होंने कानपुर आईआईटी से एमटेक की पढ़ाई की है।

उनकी शुरुआती पढ़ाई रांची में हुई, क्योंकि उनके पिता अवध बिहारी पांडेय वहीं नौकरी करते थे। पढ़ाई के बाद पीयूष ने पुलिस सेवा में लंबा और जिम्मेदार अनुभव हासिल किया।
परिवार की भूमिका और जुड़ाव
पीयूष के पिता अवध बिहारी पांडेय हैवी इलेक्ट्रिकल कॉरपोरेशन में Assistant Director के पद से रांची से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वर्तमान में वे अपने बेटे के साथ कोलकाता में रहते हैं।
उनकी माता प्रमिला पांडेय का निधन कोविड की दूसरी लहर के दौरान हो गया था। पीयूष की बहन Dr. Richa Bajpai गुरुग्राम में स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं।
पत्नी, बच्चे और उपलब्धियां
पीयूष की पत्नी मीनाक्षी पांडेय हैं। उनके दो बेटे हैं—प्रभव और सनथ। प्रभव Australia से LLM करने के बाद कोलकाता हाईकोर्ट में वकालत कर रहे हैं, जबकि सनथ अमेरिका में इंजीनियर हैं।
प्रधानमंत्री की सुरक्षा से गांव तक का नाता
आशुतोष पांडेय ने बताया कि पीयूष प्रधानमंत्री Narendra Modi की SPG में भी अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं और जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री के साथ तुर्की भी गए थे। जब भी वे कानपुर आते हैं, अपने पैतृक गांव करबिगवां जरूर जाते हैं।
हनुमान मंदिर से गहरी आस्था
पीयूष और उनके परिवार की साढ़ के कुड़नी स्थित हनुमान मंदिर में गहरी आस्था है। कानपुर आने पर वे वहां दर्शन के लिए जरूर जाते हैं। हाल ही में 28 दिसंबर को उनके पिता अवध बिहारी पांडेय भी वहां दर्शन करने पहुंचे थे।
यह सफलता न सिर्फ एक अधिकारी की उपलब्धि है, बल्कि एक गांव के सपनों की जीत भी है।




