Supreme Court: दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में आरोपी बनाए गए उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिलने पर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है।
वामपंथी दलों ने इस फैसले पर नाराज़गी जताई है।
साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी इस निर्णय की खुलकर आलोचना की है।
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) ने कोर्ट के फैसले को गलत बताया।
पार्टी का कहना है कि उमर खालिद और शरजील इमाम को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत पांच साल से अधिक समय से जेल में रखा गया है, जबकि अब तक न तो मुकदमा पूरा हुआ है और न ही किसी तरह की दोषसिद्धि हुई है। पार्टी के अनुसार यह स्थिति प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
CPI(M) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बिना ट्रायल के जेल में रखना उसकी आज़ादी और जल्द सुनवाई के संवैधानिक अधिकार को कमजोर करता है। पार्टी ने दोहराया कि “जमानत नियम है, जेल नहीं।”
साथ ही UAPA कानून को बहुत सख्त बताते हुए आरोप लगाया गया कि मौजूदा सरकार इसका इस्तेमाल असहमति की आवाज़ों को दबाने के लिए कर रही है।
यूएपीए और जमानत पर उठे सवाल
वहीं, प्रियांक खड़गे ने भी जमानत खारिज होने पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “विकसित भारत में आपका स्वागत है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था में आवाज उठाने वालों को जमानत नहीं मिलती, जबकि गंभीर आरोपों वाले लोगों को राहत मिल जाती है।
अपने पोस्ट में उन्होंने कुछ चर्चित नामों का जिक्र करते हुए तुलना की और कहा कि कुछ प्रभावशाली लोगों को जमानत मिल जाती है, लेकिन उमर खालिद जैसे लोगों को जेल में रखा जाता है।
इस पूरे मामले के बाद एक बार फिर UAPA कानून, जमानत की प्रक्रिया और न्याय व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक दल इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।




