Forced to Visit Government Offices : मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड से सरकारी तंत्र का अनाेखा कारनामा सामने आया है। यहां के तीन वृद्ध (Old Man) अपने जीवित हाेने का प्रमाण सरकार और लाेगाें काे देने काे दर-दर भटक रहे है।
दरअसल मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत पोखराम परमानंदपुर पंचायत के नवटोलिया, वार्ड संख्या 12 के सुरेंद्र यादव, सुगिया देवी और जयमंती देवी इन दिनाें सरकारी कार्यालय के चक्कर काटने काे मजबूर है। जिंदा लोगों को सरकारी Record में मृत घोषित कर दिया गया, जिससे उनकी वृद्धा पेंशन अचानक बंद हो गई।

इस घटना ने न सिर्फ पीड़ित परिवारों को आर्थिक संकट में डाल दिया है, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुरेंद्र यादव, सुगिया देवी और जयमंती देवी जैसे लाभुक वर्षों से वृद्धा पेंशन योजना का लाभ ले रहे थे लेकिन अचानक खाते में पैसा आना बंद हो गया।
जब प्रखंड कार्यालय में जानकारी ली गई, तो पता चला कि सरकारी Portal पर उन्हें ‘मृत’ दिखा दिया गया है। पीड़ित सुगिया देवी का दर्द छलक पड़ा।
उन्होंने कहा, “हम जिंदा हैं, फिर भी कागज पर मरा दिया गया… पेंशन बंद हो गया… हम गरीब लोग कहां जाएं?”

बिना किसी भौतिक सत्यापन और जांच के जिंदा लोगों को सिस्टम में मृत घोषित कर देना प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा मानी जा रही है।
मिल रहा सिर्फ आश्वासन, आर्थिक संकट में परिवार
वृद्धा पेंशन ही इन बुजुर्गों के लिए जीवनयापन का सहारा थी। Pension बंद होने से दवा, राशन और दैनिक जरूरतों पर संकट गहरा गया है। परिजनों का कहना है कि कई बार कार्यालय का चक्कर लगाने के बाद भी सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
काैन है जिम्मेदार, लगाये जा रहे आराेप
स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि Murliganj प्रखंड कार्यालय में बिना पैसे के कोई काम नहीं होता। हर काम के लिए घूस मांगी जाती है।
लोगों का कहना है कि प्रखंड कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है और गरीबों की सुनवाई नहीं हो रही। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसकी लापरवाही से जिंदा इंसानों को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया?
क्या यह Data Entry की गलती है या किसी स्तर पर गंभीर अनियमितता? क्या सिर्फ जांच का आश्वासन देकर मामला दबा दिया जाएगा, या दोषियों पर ठोस कार्रवाई भी होगी? निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं।




