SC ने राज्य संघों को चेताया, न्यायालय के आदेशों को विफल करने के लिए ‘गुपचुप तरीके’ नहीं अपनाएं

News Alert
5 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने बुधवार को राज्य फुटबॉल संघों को चेतावनी दी कि वह न्यायालय (Court) के आदेशों को विफल करने के लिए उनके ‘गुपचुप तरीकों’ की सराहना नहीं करता और यह उन पर निर्भर है कि वे भारत में 2022 फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप आयोजित करें।

खेल मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी

शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने तीन अगस्त को एक आदेश पारित किया था और आगे का रास्ता यह है कि प्रशासकों की समिति (COA) और केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (FIFA) और एशियाई फुटबॉल परिसंघ (AFC) के साथ काम करें।

Court ने इस तथ्य पर गौर किया कि भारत को 11 अक्टूबर 2022 से FIFA अंडर -17 महिला विश्व कप 2022 की मेजबानी करनी है।

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति A S बोपन्ना की पीठ ने कहा कि वह राज्य फुटबॉल संघों, केंद्र द्वारा दायर संशोधन आवेदनों और COA द्वारा अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के अपदस्थ अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ कथित रूप से शीर्ष अदालत की ‘कार्रवाई में हस्तक्षेप’ के लिए दायर अवमानना ​​याचिका को गुरुवार के लिए सूचीबद्ध कर रही है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी से कहा

पीठ ने राज्य Football संघों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी से कहा, ‘‘हम न्यायालय के आदेशों को विफल करने के लिए आपके गुपचुप तरीके अपनाने की सराहना नहीं करते हैं।

अंततः आपको यह तय करना होगा कि आप Tournament आयोजित करना चाहते हैं या नहीं। हम भी देख रहे थे कि हमारे पिछले सप्ताह के आदेश के बाद क्या हो रहा था।’’

मेनका ने कहा कि उन्होंने एक Application भी दायर किया है और चाहती हैं कि इसे अन्य पक्षों द्वारा दायर अन्य आवेदनों के साथ सूचीबद्ध किया जाए।

भविष्य इसी टूर्नामेंट पर निर्भर करता है

उन्होंने कहा, ‘‘हम भी चाहेंगे कि टूर्नामेंट इसी देश में हो। फुटबॉल में हमारे देश का भविष्य इसी टूर्नामेंट (Tournament ) पर निर्भर करता है।’’

पीठ ने कहा कि वह सभी Application पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को इस पर विचार करेगी।

शुरुआत में COA की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उन्होंने अवमानना ​​याचिका दायर की है क्योंकि दुर्भाग्य से कुछ परेशान करने वाली घटनाएं हुई हैं और उन्हें ‘‘एक व्यक्ति के हस्तक्षेप के कारण Court के आदेश के कार्यान्वयन में समस्या का सामना करना पड़ रहा है जिसे इस न्यायालय द्वारा बाहर कर दिया गया है।’’

Application दाखिल करना पड़ा

उन्होंने कहा कि उन्होंने पाया है कि इस हस्तक्षेप के कारण केंद्र सरकार (Central government) को भी कुछ दबाव का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें एक संशोधन Application दाखिल करना पड़ा।

युवा मामले और खेल मंत्रालय की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने कहा कि उन्होंने एक संशोधन Application दायर कर तीन अगस्त के आदेश को संशोधित करने की मांग की है क्योंकि फीफा ने उन्हें ‘रोडमैप’ का पालन नहीं करने के बारे में लिखा है।

FIFA का यह पत्र अंतरिम आदेश

जैन ने कहा, ‘‘FIFAने कहा है कि अगर उनके सहमत Roadmap का पालन नहीं किया गया तो वे मेजबानी के अधिकार वापस ले लेंगे। फीफा का यह पत्र अंतरिम आदेश के कारण आया है और इसलिए हमने आवेदन दायर किया है।’’

पीठ ने जैन से कहा कि फीफा (FIFA) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है और यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और सबसे अच्छा तरीका यह है कि केंद्र और coa fifa के साथ काम करें और सुनिश्चित करें कि टूर्नामेंट आयोजित किया जाए।

पीठ ने कहा, ‘‘हमें लगता है कि आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत है और अपने मुवक्किल (केंद्र) से हस्तक्षेप करने और फीफा प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा करने और इस मामले को सुलझाने के लिए कहें। उम्मीद है कि कोई रास्ता मिल जाएगा। हम कल (गुरुवार) के लिए सभी आवेदनों को सूचीबद्ध करेंगे। ’’

शंकरनारायणन ने कहा कि उनके अवमानना ​​​​आवेदन को भी सूचीबद्ध किया जाना चाहिए, हालांकि वे इसके लिए जोर नहीं देंगे लेकिन दस्तावेजीकरण के उद्देश्यों के लिए इसे सूचीबद्ध किया जा सकता है, जिस पर पीठ ने सहमति व्यक्त की।

Share This Article